गुरु पूर्णिमा पर गुरु महिमा का किया वर्णन, भगवान वेदव्यास की पूजा और सद्गुरु की शरण में जाने का दिया संदेश
फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर रामानुज आश्रम के धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में गुरु का स्थान सर्वोच्च है और सद्गुरु ही मनुष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने भी लिखा है— "गुरु बिनु भव निधि तरहिं न कोई, जौं बिरंचि संकर सम होई।" अर्थात इस संसार रूपी भवसागर से पार लगाने वाला केवल गुरु ही है। गुरु पूर्णिमा भगवान वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाई जाती है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धर्माचार्य ने बताया कि भगवान श्रीमन्नारायण आदिगुरु हैं और उन्हीं की परंपरा से विभिन्न वैष्णव संप्रदायों का विस्तार हुआ। भगवान वेदव्यास ने वेदों का विभाजन, महाभारत, पुराणों और ब्रह्मसूत्रों की रचना कर मानव समाज पर महान उपकार किया। उनके कारण ही सनातन ज्ञान जन-जन तक पहुंच सका। उन्होंने कहा कि आज के समय में सच्चे गुरु की पहचान करना अत्यंत आवश्यक है। बिना विचार किए किसी को गुरु नहीं बनाना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, "गुरु बनाओ जानकर, पानी पियो छानकर, तभी आपका कल्याण होगा।" सद्गुरु की शरण में जाकर ही जीवन सफल बन सकता है। उन्होंने बताया कि 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन स्नान, ध्यान, गुरु पूजन और भगवान वेदव्यास की आराधना का विशेष महत्व है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपने गुरु का सम्मान करने, उनका पूजन करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का मुख्य आयोजन 29 जुलाई को प्रातः 9 बजे से श्री जीयर स्वामी मठ, श्री जगन्नाथपुरी में आयोजित होगा। साथ ही रामानुज आश्रम, संत रामानुज मार्ग, शिवजीपुरम, प्रतापगढ़ में भी गुरु पूजन एवं धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होंगे। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
