बाबा फरीद जी की पवित्र नगरी में नतमस्तक होने पहुंच रही हैं देश-विदेश से संगतें, हर अरदास होती है महान सूफी संत और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में दर्ज पावन बाणी के रचयिता हजरत बाबा शेख फरीद जी की चरण-छोह प्राप्त ऐतिहासिक नगरी में इन दिनों भारी आध्यात्मिक रौनक देखने को मिल रही है। स्थानीय मुख्य धार्मिक केंद्र गुरुद्वारा टिल्ला बाबा फरीद जी में शीश नवाने और आत्मिक शांति प्राप्त करने के लिए देश के कोने-कोने के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंच रहे हैं।आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्रसंगत के बीच यह अटूट विश्वास है कि इस पवित्र टिल्ले पर आकर जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से अरदास करता है, बाबा जी उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। गुरुद्वारा साहिब के प्रबंधकों के अनुसार, यहां रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक होते हैं। संगत के लिए गुरुबाणी का पाठ, कीर्तन और अटूट लंगर की सेवा निरंतर चौबीसों घंटे जारी रहती है।बाबा फरीद जी की बाणी और उपदेशइस अवसर पर धार्मिक विद्वानों ने बाबा फरीद जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनकी बाणी मानवता को आपसी प्यार, नम्रता, संतोष और परमात्मा की भक्ति का मार्ग दिखाती है। गुरुबाणी में दर्ज उनके अनमोल श्लोक आज के तनावपूर्ण दौर में मानव जीवन को सही दिशा देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं:"रूखी सूखी खाइ कै ठंढा पाणी पीउ ॥ फरीदा देखि पराई चोपड़ी ना तरसाए जीउ ॥"सालाना आगमन पूर्व मेले की तैयारियांयहां यह भी उल्लेखनीय है कि हर साल सितंबर महीने में मनाए जाने वाले सालाना 'बाबा शेख फरीद आगमन पूर्व' (विरासत मेले) को लेकर भी प्रशासन और स्थानीय कमेटियों द्वारा अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। यह मेला पंजाब के प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक मेलों में से एक माना जाता है।
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