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पूर्वांचल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ तरकुलही देवी मंदिर के बाहर खुलेआम मांस कटान से श्रद्धालुओं में रोष, निर्धारित स्थान पर व्यवस्था की मांग
  • 151167985 - JASVEER MODANWAL 54 65
    26 Jul 2026 17:58 PM



 

यूपी, गोरखपुर l पूर्वांचल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ तरकुलही देवी मंदिर के बाहर सड़क किनारे खुलेआम बकरे-बकरियों का मांस काटे जाने को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु माँ तरकुलही देवी के दर्शन-पूजन के लिए यहां पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे श्रद्धालुओं की भी होती है जो मांसाहार से पूरी तरह परहेज करते हैं। उनका कहना है कि मंदिर के मुख्य मार्ग पर खुलेआम मांस कटान होने से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं तथा उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर के बाहर दर्जनों की संख्या में मांस विक्रेता सड़क किनारे ही बकरे-बकरियों का कटान करते हैं। कटान के दौरान फैली दुर्गंध, गंदगी और बहता हुआ अपशिष्ट न केवल श्रद्धालुओं को परेशान करता है, बल्कि महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए भी असुविधा का कारण बनता है। कई छोटे बच्चे इस दृश्य को देखकर भयभीत और मानसिक रूप से विचलित हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि माँ तरकुलही देवी मंदिर पूर्वांचल की आस्था का प्रमुख शक्तिपीठ है, जहां दूर-दराज़ के जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर की धार्मिक महत्ता को देखते हुए उसके आसपास स्वच्छ, शांत और श्रद्धापूर्ण वातावरण बनाए रखना आवश्यक है।
लोगों ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर की परंपरा के अनुसार श्रद्धालु अपनी आस्था और मान्यता के अनुरूप बकरे की बलि अर्पित करते हैं, जो वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। लेकिन बलि की परंपरा और सड़क किनारे खुलेआम व्यावसायिक रूप से मांस कटान करना दो अलग-अलग विषय हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मुख्य मार्ग पर लगातार खुलेआम मांस काटे जाने से मंदिर की गरिमा प्रभावित होती है और आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर के आसपास सड़क किनारे खुलेआम मांस कटान पर प्रभावी रोक लगाई जाए तथा मांस विक्रेताओं के लिए एक निर्धारित एवं उपयुक्त स्थान चिन्हित किया जाए, जहां यह कारोबार संचालित हो सके। उनका कहना है कि इससे एक ओर व्यापारियों को भी सुविधा मिलेगी और दूसरी ओर पूर्वांचल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ तरकुलही देवी की गरिमा एवं पवित्रता बनी रहेगी तथा दर्शन के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। रिपोट - जसवीर मोदनवाल 151167985



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