- बदलते दौर में भी जिंदा है सावन की खुशबू, बारिश ने ताज़ा की बचपन की यादें
- सावन की फुहारों ने लौटाए बचपन के दिन, कागज़ की नाव और खीर-पूड़े की यादें हुईं ताज़ा
- डिजिटल दौर में भी सावन का जादू बरकरार, बारिश ने हर दिल को छुआ
- झमाझम बारिश के साथ लौटी बचपन की मुस्कान, सावन ने बिखेरी खुशियां
- सोशल मीडिया पर छाया सावन का रंग, लोगों ने साझा की बचपन की यादें
- सावन की बारिश बनी यादों का उत्सव, हर उम्र के लोगों ने जिया अपना बचपन
बदलते दौर में आज भी जिंदा है सावन की खुशबू जिला फिरोजपुर गांव शहजादी23 जुलाई): सावन के महीने की शुरुआत होते ही आसमान में छाए काले बादलों और ठंडी हवाओं ने हर एक के दिल को छू लिया है। इस सुहावने मौसम ने न सिर्फ गर्मी से राहत दी, बल्कि हर उम्र के व्यक्ति के मन में "बचपन की झांकी" ला दी है।
आज की तेज बारिश के दौरान कई जगहों पर लोग अपने घरों की छतों और गलियों में बारिश का आनंद लेते नजर आए। बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि सावन महीने की यह झड़ी उन दिनों की याद दिलाती है जब बारिश होने पर स्कूलों में छुट्टी हो जाती थी।
कागज की नावें और खीर-पूड़े
इस डिजिटल युग में जहाँ बच्चे मोबाइल फोन तक सीमित हो गए हैं, वहीं आज की बरसात ने पुरानी संस्कृति की झलक दोबारा दिखाई। घरों में खीर-पूड़े बनाने की परंपरा फिर से जीवित होती दिखी। कुछ जगहों पर बच्चों के साथ-साथ बड़ों ने भी पानी के बहाव में कागज की नावें चलाकर अपने बचपन को दोबारा जिया।
सोशल मीडिया पर भी छाई यादों की झड़ी
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी आज "सावन के महीने में बचपन मार गया झांकी" ट्रेंड करता रहा। लोगों ने अपने बचपन की तस्वीरें और बारिश के वीडियो साझा करके पुरानी यादों को ताजा किया। सबका यही मानना है कि भले ही समय बदल गया है, लेकिन सावन के महीने का अहसास आज भी हर इंसान को बच्चा बना देता है। यह थी धरमवीर सिंह की रिपोट
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