फ़ास्ट न्यूज़ इंडिया यूपी कासगंज। जनपद के ढोलना थाना क्षेत्र में लकड़ी माफियाओं की गुंडागर्दी और दुस्साहस का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। नदरई-सिकंदराराऊ रोड पर स्थित एक सीमेंट फैक्ट्री के परिसर में प्रतिबंधित पेड़ों के अवैध कटान की सूचना पर पहुंचे वन विभाग के बीट प्रभारी को माफियाओं ने बंधक बना लिया। आरोपियों ने उन पर लाठी-डंडों और ईंटों से जानलेवा हमला कर लहूलुहान कर दिया। गंभीर हालत में घायल वन दरोगा को जिला अस्पताल से आगरा हायर सेंटर रेफर किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, मारूपुर गांव के पास स्थित एक बड़ी सीमेंट फैक्ट्री की ऊंची बाउंड्रीवॉल के अंदर प्रतिबंधित और छूट प्रजाति के पेड़ों का एक बड़ा बगीचा था। पिछले कई दिनों से लकड़ी ठेकेदार और माफिया इस हरे-भरे क्षेत्र को दीमक की तरह साफ करने में जुटे थे। चोरी-छिपे भारी मात्रा में पेड़ों को काटकर वाहनों के जरिए तस्करी की जा रही थी।
कार्रवाई की बात पर बौखलाए माफिया, अंदर से लगाया ताला
जब इस अवैध कटान की भनक वन विभाग को लगी, तो बीट प्रभारी आकाश कुमार अपने साथी कर्मियों मोहित कुमार और राहुल चौधरी के साथ मौके पर छापेमारी करने पहुंचे। वहां एक गाड़ी लकड़ी से लदी खड़ी थी और कटान जारी था। वन दरोगा आकाश कुमार ने जब कड़ा रुख अपनाते हुए लकड़ी लदी गाड़ी को वन विभाग कार्यालय ले जाने और उच्चाधिकारियों से शिकायत की बात कही, तो वहां मौजूद ठेकेदार और लकड़हारे बौखला गए। आरोपियों ने सोची-समझी साजिश के तहत फैक्ट्री का मुख्य गेट अंदर से बंद कर दिया ताकि वनकर्मी बाहर न भाग सकें।
जानलेवा हमला और दीवार फांदकर बचे कर्मचारी
गेट बंद करने के बाद दबंग ठेकेदारों और लकड़हारों ने गाली-गलौज करते हुए वन दरोगा आकाश कुमार को घेर लिया। आरोपियों ने उन पर लाठी-डंडों और ईंटों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे उनके सिर, कंधे और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। इस बीच, मौका पाकर साथी कर्मचारी मोहित और राहुल दीवार फांदकर बाहर भागे और शोर मचाया। लहूलुहान आकाश कुमार भी किसी तरह माफियाओं के चंगुल से छूटकर दीवार कूदकर जान बचाकर बाहर आए।
हालत नाजुक, आगरा रेफर
घटना के बाद घायल वन दरोगा को तुरंत कासगंज जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी अत्यंत नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत आगरा अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।सरकारी कर्मचारी पर हुए इस दुस्साहसिक हमले से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही ढोलना थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दबिश देकर हमले में शामिल तीन आरोपियों को शिकंजे में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे गिरोह को चिन्हित कर लिया गया है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
गंभीर सवाल: जांच के दायरे में सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन भी
इस पूरी वारदात ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की सुरक्षा पर तो सवाल उठाए ही हैं, साथ ही उक्त सीमेंट फैक्ट्री संचालक को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है l वहीं साजिश य वनकर्मियों के पहुंचते ही फैक्ट्री का गेट अंदर से बंद करना क्या किसी बड़ी प्री-प्लानिंग का हिस्सा था?
क्या हमलावरों को किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त था? पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर फैक्ट्री परिसर के अंदर से इतनी बड़ी तादाद में प्रतिबंधित पेड़ किसके इशारे पर बेचे और काटे जा रहे थे?
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस फैक्ट्री के जहरीले धुएं और उड़ती राख से आसपास के जीव-जंतु, फसलें और मानवीय स्वास्थ्य पहले से ही गंभीर रूप से प्रभावित हैं। पूर्व में कई शिकायतों के बावजूद इस पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
बड़ा सवाल
क्या सरकारी कर्मचारी का खून बहाने वाले इन पर्यावरण दुश्मनों और लकड़ी माफियाओं पर प्रशासन इतनी सख्त कार्रवाई (जैसे गैंगस्टर या रासुका) करेगा जो मिसाल बने, या फिर यह मामला भी समय के साथ फाइलों में दबकर रह जाएगा? क्षेत्र की जनता अब पुलिस कार्रवाई पर नजरें टिकाए बैठी है। रिपोर्ट संजय सिंह 151110069
