मेरठ की हालिया घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक चिंतक एवं वरिष्ठ समाजसेवी मुसरफ ख़ान ने देश के युवाओं के नाम एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि किसी के भड़काने से भावनाओं में बहकर सड़क पर हिंसा, हंगामा और अराजकता का रास्ता अपनाने से किसी पीड़ित को न्याय नहीं मिलता, बल्कि सबसे अधिक नुकसान देश के गरीब, मजदूर, दलित और वंचित समाज के युवाओं के भविष्य को उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कुछ संगठन और राजनीतिक दल अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए युवाओं को भड़काकर सड़क पर उतारते हैं। ऐसी परिस्थितियों में मुकदमे, गिरफ्तारी और कानूनी परेशानियों का बोझ अंततः उन्हीं युवाओं के पूरे परिवार पर पड़ता है, जबकि राजनीतिक लाभ कोई और उठा लेता है। देश विरोधी और संबिधान विरोधी राजनीति में हमेशा ग़रीब मजदूर दलित वर्ग ही पिसता आया हैं। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा, देशहित में अराजकता से दूर रहिए, किसी का मोहरा मत बनिए और जोश के साथ हमेशा होश भी रखिए।
मुसरफ ख़ान ने कहा कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष अवश्य होना चाहिए, लेकिन वह भारतीय संविधान और कानून की मर्यादाओं के भीतर होना चाहिए। उन्होंने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में न्याय का सबसे मजबूत माध्यम न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाएं हैं। जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय सहित सभी वैधानिक उपायों का उपयोग करते हुए न्याय की लड़ाई लड़नी चाहिए, न कि कानून को हाथ में लेकर।
उन्होंने कहा कि न्याय के नाम पर सड़क जाम, हिंसा, तोड़फोड़ या अराजक गतिविधियों से न तो पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिलता है और न ही समाज का कोई भला होता है। इससे गरीब और कमजोर वर्गों की समस्याएं और अधिक बढ़ जाती हैं। अपने वक्तव्य में उन्होंने उन राजनीतिक बयानों का भी उल्लेख किया जिनमें न्यायिक प्रक्रिया की अवधि को लेकर प्रश्न उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था अपनी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्य करती है और सभी मामलों में जांच, विवेचना, आरोपपत्र तथा न्यायालयीन सुनवाई के बाद ही निर्णय आता है। यदि सरकारें चाहें तो फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से गंभीर मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित कर सकती हैं।
मेरठ प्रकरण के संदर्भ में मुसरफ ख़ान ने कहा कि यूपी पुलिस अपना काम कर रही हैं, पुलिस ने चार आरोपी पकड़े हैं। लेक़िन एक अधिकारी कि बजह से पूरी पुलिस पर उंगलियां उठ रही हैं। किसी को भी बैन में बुरी तरह थप्पड़ मारना और गाली देना ग़लत व्यवहार हैं। एक कप्तान का ऐसा रवैया नहीं होना चाहिए यह ग़लत हैं। किसी भी पुलिस अधिकारी का आचरण कानूनसम्मत, संयमित और गरिमापूर्ण होना चाहिए। अगर कल गलती से ऐसा आप के साथ हो जाएं तो फ़िर भी आप ग़लत को ही सपोट करेंगे, जो कि बहुत गलत हैं। कप्तान को अपने इस कृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए और जो देश विरोधी, संबिधान विरोधी इस घटना से खुश हो होकर एसपी को बधाई देकर कह रहे हैं कि बहुत अच्छा कार्य किया है। तो क्या फ़िर भरत तिवारी एन्काउन्टर करने वाले सभी पुलिस कर्मियों की भी पदोन्नति होनी चाहिए और राष्ट्रपति पुरस्कार देना चाहिए?
उन्होंने कहा जिनकों यह ग़लत घटना सही लग रही है। वह भी याद रखे आप के घर में भी बहन बेटियों हैं, भगवान ना करें अगर आप की बहन या बेटी के साथ अगर ये काम होता तो आप क्या करते? कुछ भी अनाप सनाप बोलना या ग़लत कमेंट करना बहुत आसान हैं। थोड़ा सोचो क्योंकि आप के घर मे भी बहन बिटिया हैं। यदि किसी अधिकारी द्वारा अभद्र भाषा, अपमानजनक व्यवहार या अनुचित आचरण किया गया है तो जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं गृह विभाग से अपील करते हुए कहा कि किसी अधिकारी पर आरोप तथ्यात्मक रूप से सही पाए जाते हैं तो उसके विरुद्ध निष्पक्ष एवं विधिसम्मत कार्रवाई की जाए, ताकि जनता का कानून और प्रशासन पर विश्वास बना रहे।
अपने संदेश के अंत में मुसरफ ख़ान ने युवाओं से पुनः आह्वान करते हुए कहा कि "देश की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा वर्ग है। इसलिए भावनाओं में बहकर अपना भविष्य दांव पर न लगाएं। संविधान पर विश्वास रखें, कानून का सम्मान करें, अनुभवी मार्गदर्शकों की सीख को अपनाएं और देशहित को सर्वोपरि रखते हुए शांति, संयम तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ न्याय की लड़ाई लड़ें। रिपोर्ट नंद किशोर शर्मा 151170853
