फास्ट न्यूज़ इंडिया मध्य प्रदेश शिवपुरी पिछोर। नगर में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई जल आवर्धन योजना वर्षों बाद भी अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकी है। वर्ष 2017 में शुरू हुई इस योजना का ठेका रियान (रेहान) वॉटर सप्लाई कंपनी को दिया गया था। योजना के तहत दो वर्षों के भीतर नगर के सभी वार्डों में घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन आज करीब 8 से 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह परियोजना अधूरी पड़ी है।
नगरवासियों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज भी कई क्षेत्रों में नियमित जल आपूर्ति नहीं हो रही है। हालात यह हैं कि नगर की पानी की टंकियां खाली पड़ी हैं और लोग पेयजल के लिए परेशान हैं।
सूत्रों के अनुसार, कंपनी पर लगभग 3.50 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है। आर्थिक संकट के चलते कंपनी बिजली बिल तक जमा नहीं कर पा रही है, जिससे जल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
इस संबंध में प्लांट मैनेजर सुधीर से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि बिजली बिल का भुगतान नगर पालिका द्वारा किया जाना है और इस विषय पर बातचीत चल रही है।
वहीं, नगर पालिका के प्रभारी सीएमओ दीपक बनाफर ने स्पष्ट किया कि संबंधित कंपनी ने अभी तक योजना का कार्य पूर्ण कर नगर पालिका को हैंडओवर नहीं किया है। उनका कहना है कि जब तक कंपनी पूरा कार्य पूरा कर औपचारिक रूप से हैंडओवर नहीं करती, तब तक नगर पालिका बिजली बिल का भुगतान नहीं करेगी।
इधर कंपनी और नगर पालिका के बीच जिम्मेदारी तय करने की खींचतान का खामियाजा नगर की जनता भुगत रही है। एक ओर अधिकारी और कंपनी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, तो दूसरी ओर लोग शुद्ध पेयजल के लिए परेशान हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब 25 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी जल आवर्धन योजना की जवाबदेही आखिर किसकी है? वर्षों से अधूरी पड़ी इस परियोजना और संबंधित कंपनी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और आखिर कब तक पिछोर की जनता को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा? रिपोर्टर राजू जाटव पिछोर
