आगरा। परिवार न्यायालय संख्या-03, आगरा की अपर प्रधान न्यायाधीश श्रीमती शुभी गुप्ता ने धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत दायर भरण-पोषण वाद में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए वादिनी का दावा निरस्त कर दिया। न्यायालय ने मौखिक, दस्तावेजी एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का समग्र परीक्षण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि वादिनी अपने आरोपों तथा पति से पृथक रहने के पर्याप्त एवं उचित कारण को सिद्ध करने में असफल रही।
मामले में प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता अरविन्द पुष्कर ने सशक्त एवं तथ्यपरक पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष सीसीटीवी फुटेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तथा दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत किए। इसके अतिरिक्त वादिनी एवं उसके गवाहों से की गई विस्तृत और प्रभावी जिरह के माध्यम से उनके बयानों में मौजूद महत्वपूर्ण विरोधाभासों को उजागर किया गया, जिसने प्रकरण के वास्तविक तथ्यों को स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभाई।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने यह स्थापित किया कि वादिनी बिना किसी पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण के अपने पति से अलग रह रही है। न्यायालय ने उपलब्ध समस्त साक्ष्यों और परिस्थितियों का गहन मूल्यांकन करते हुए पाया कि वादिनी अपने दावों के समर्थन में विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी।
निर्णय में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार यदि पत्नी बिना उचित एवं पर्याप्त कारण के पति के साथ रहने से इंकार करती है अथवा उससे पृथक निवास करती है, तो वह भरण-पोषण प्राप्त करने की अधिकारी नहीं होती। प्रस्तुत प्रकरण में वादिनी इस कानूनी कसौटी पर अपना दावा सिद्ध करने में असफल रही।
न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी माना कि प्रतिवादी पक्ष द्वारा प्रस्तुत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, दस्तावेजी प्रमाण तथा प्रभावी जिरह ने मामले की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने में निर्णायक भूमिका निभाई। इन्हीं तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर परिवार न्यायालय ने भरण-पोषण वाद को खारिज करते हुए प्रतिवादी के पक्ष में निर्णय पारित किया। रिपोर्ट नंद किशोर शर्मा 151170853
