धर्म की रक्षा और मानव कल्याण के लिए हुआ श्रीकृष्ण का अवतार: कथा व्यास
कथा व्यास बोले— धर्म की रक्षा और मानव कल्याण के लिए हुआ भगवान श्रीकृष्ण का अवतार
'नंद के आनंद भयो' के जयघोष से गूंजा साई धाम, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर उमड़ा जनसैलाब
फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। राहाटीकर क्षेत्र के साई धाम मंदिर, रामपुर कसिहा में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही यज्ञशाला वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और हवन की पावन सुगंध से गुंजायमान रही। दूर-दराज़ से पहुंचे श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, क्षेत्र की खुशहाली और विश्व शांति की मंगलकामना की। सायंकाल आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ता है तथा धर्म संकट में पड़ता है, तब-तब भगवान स्वयं अवतार लेकर धर्म की पुनर्स्थापना, सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश का कार्य करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का अवतार केवल कंस के अत्याचार का अंत करने के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को प्रेम, सत्य, करुणा, कर्तव्य और धर्म का संदेश देने के लिए हुआ। कथा व्यास ने श्रीकृष्ण जन्म की अलौकिक लीला का वर्णन करते हुए बताया कि मथुरा की कारागार में देवकी और वसुदेव के यहां भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया। उनके प्राकट्य के साथ ही कारागार के बंधन स्वतः खुल गए और वसुदेव नवजात श्रीकृष्ण को यमुना पार कर गोकुल ले गए, जहां नंद बाबा और माता यशोदा के स्नेह में उनका पालन-पोषण हुआ। इस दिव्य प्रसंग का वर्णन सुनते ही पूरा कथा पंडाल "जय श्रीकृष्ण", "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" और "हाथी-घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की" के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर झूमने लगे और वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया। अपने प्रेरक प्रवचन में कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन संघर्षों के बीच सत्य, धैर्य, संयम, सेवा और निष्काम कर्म का अनुपम संदेश देता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाए, तो परिवार में प्रेम, समाज में सद्भाव और राष्ट्र में समृद्धि का वातावरण स्वतः स्थापित हो सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से श्रीमद्भागवत कथा का नियमित श्रवण करने, भगवान के नाम का स्मरण करने, गौ सेवा, संत सेवा तथा निर्धनों और जरूरतमंदों की सहायता करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है, जो व्यक्ति को मोह-माया से मुक्त कर भक्ति और आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर करता है। कथा के दौरान भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महिलाओं ने मंगलगीत गाए, बच्चों ने श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से नृत्य कर जन्मोत्सव की दिव्यता का आनंद लिया। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया तथा कथा व्यास से आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन समिति ने बताया कि श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन 8 जुलाई को महायज्ञ की पूर्णाहुति एवं कथा विश्राम के साथ संपन्न होगा। इसके उपरांत 9 जुलाई को 64 गांवों के श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण, यज्ञ में सहभागिता तथा धर्म लाभ अर्जित करने की अपील की। आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारी, ग्रामवासी एवं स्वयंसेवक पूरे समर्पण और सेवा भाव के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
