वाराणसी । मानसून असीमित जलराशि के साथ प्रकृति को नवजीवन देने आ रहा है। इसी के साथ पौधारोपण का काम शुरू हो जाएगा। प्रदेश सरकार ने इस साल भी करोड़ों पौधे लगाने की योजना बनाई है। सरकार द्वारा मौजूदा और भावी पीढ़ियों को दिया जाने वाला इससे बेहतर कोई अन्य योगदान नहीं हो सकता। 1 जुलाई से 7 जुलाई तक वन विभाग द्वारा वन सप्ताह भी मनाया जा रहा है। यद्यपि इस एजेंडे में जल संचय और भूगर्भ जल रिचार्ज को भी शामिल कर लिया जाए तो सोने में सुहागा जैसी स्थिति पैदा की जा सकती है। वैसे यह दोनों कार्य सरकार की वार्षिक योजना में शामिल हैं।
पौधारोपण को लेकर स्थिति पहले से बेहतर हुई है। बहरहाल, जल संचय और भूगर्भ जल रिचार्ज को लेकर अभी भी अपेक्षित सजगता नहीं दिखती है। देश और प्रदेश के अधिकतर अंचलों में भूगर्भ जल स्तर में तीव्र गिरावट देखते हुए सरकारी तंत्र से लेकर आम आदमी तक की यह बेपरवाही हैरतअंगेज है।
राज्य सरकार सहित आमजन को खुद इसकी पहल करके भूजल संचय और भूगर्भ जल रिचार्ज के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में तो लाखों प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराए जाने की नीति के तहत तालाब खोदवाकर जलसंचय करने का मुंहमांगा अवसर है। शहरी क्षेत्रों में नागरिकों को उनकी छत पर भूगर्भ जल रिचार्ज प्रणाली स्थापित करवाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। जल की मौजूदगी प्रकृति के जीवंत होने का संकेत है ।
इसलिए प्रचुर मात्रा में जल संचय करके प्रकृति की गोद को जीवन- रस से लबालब रखा जा सकता है ।। रविन्द्र गुप्ता
