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डॉ. नीतू कार्की कोटाबाग क्षेत्र में आम जनता और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच को बेहतर बनाने के लिए संकल्पबद्ध
  • 151173860 - ARUN KUMAR NAGPAL 1 1
    28 Jun 2026 16:22 PM



 

 उत्तराखंड नैनीताल ।कोटा बाग, राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय डोला रियाड में स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सक (कार्यरत )डॉ. नीतू कार्की कोटाबाग क्षेत्र में आम जनता और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर शिविर और चिकित्सा कार्यक्रम का आयोजन करते हैं, जिनकी ओपीडी (OPD) ,विशिष्ट उपचार सेवाओं से पूरा क्षेत्र लाभ प्राप्त कर रहा है। उनके द्वारा बताया गया कि पास के गांव से लगभग 65 वर्षीया महिला रोगी आयी जिसके पांव में बहुत दर्द और सूजन थी और सहारे से दोनों हाथ टिकाकर मुश्किल से किसी तरह चल पा रही थी। इस महिला की कमर भी बीमारी के कारण बिल्कुल झुकी हुई थी। महिला ने बताया कि काफी जगह दिखाया है पर फायदा कम है। रक्त जांचे सभी सामान्य आती हैं। रोगी की जांचों में फॉल्स पॉजिटिव Ra factor ने इस चिकित्सा को सम्भवतः गलत दिशा दे दी । इस महिला के द्वारा पहले काफी जगह allopathic उपचार लिया गया था परंतु अधिक समय हो जाने पर अजीर्ण और सूजन अधिक हो गयी थीl रोगी को मुख्य समस्या जोड़ों में अकड़न, अपंगता ,शरीर में दर्द,अपच (अजीर्ण), पेट के ऊपरी हिस्से में होने वाली असहजता , जलन की स्थिति थी साथ ही इनकी शुगर भी बढ़ा आ रही थी और खून की कमी भी आई थी । लक्ष्णो के आधार पर बीमारी का आमवात यानी रुमेटीओड आर्थराइटिस निदान किया। प्रबंधन नियमन में आम दोष के लिए दीपन पाचन ,दर्द के लिए वात शामक औषधि दी । निरंतर उपचार (प्रबंधन नियमन )से आज लगभग 2 माह बाद मरीज की सूजन और दर्द काफी कम हो गए है और मरीज बेहतर तरीके से चल पा रही है। अम्लपित्त, अजीर्ण, शुगर अब सामन्य है। मरीज को कुछ परहेज भी बताए गए हैं। अरबी, कटहल और उड़द जैसी चीजें भारी (गुरु), देर से पचने वाली और एसिडिटी/कब्ज बढ़ाने वाली होती हैं। साथ में दही,दिन में सोना आदि भी अपथ्य है। यदि इनसे परहेज करते हैं तो शीघ्र ही लाभ होता है। इस रोगी में पंचकर्म का उपयोग भी अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हुआ। पंचकर्म चिकित्सा में बालू (रेत) से की जाने वाली सिकाई को वालुका स्वेद (Valuka Sweda) कहा जाता है। यह एक प्रकार का रुक्ष स्वेद (सूखी सिकाई या ड्राई फोमेंटेशन) है, जिसका उपयोग शरीर से 'आम' (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकालने और सूजन व जकड़न को कम करने के लिए किया जाता है।

डॉ नीतू कार्की ने बताया की आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से आमबात यानि गठिया के बेहतर उपचार के साथ मानस रोगों, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, सर्दी, जुकाम, बुखार ,अम्ल पित्त यकृत विकार ,पथरी आदि मूत्र मार्ग की बीमारियों, महिला रोगों से संबंध औषधियां चिकित्सालय में उपलब्ध रहती है। साथ ही बच्चों के लिए कई प्रकार के ज्वार अतिसार सर्दी खांसी आदि लोगों की सुरक्षित औषधियां प्राप्त कर सकते हैं।



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