प्रधानाचार्य डॉ. सोमनाथ की मौजूदगी में राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में हुई फायर मॉक ड्रिल
फायर मॉक ड्रिल से परखी गई अस्पताल की आपदा प्रबंधन व्यवस्था, चिकित्सकों व कर्मचारियों ने सीखे बचाव के तरीके
राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में फायर मॉक ड्रिल, प्रशिक्षित हुए डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारी
फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। राज्य सरकार के निर्देशों के अनुपालन में शनिवार को राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय, संबद्ध डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, प्रतापगढ़ में अग्निशमन विभाग द्वारा व्यापक फायर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस दौरान अस्पताल में आग लगने जैसी आपातकालीन स्थिति का सजीव प्रदर्शन कर चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों तथा अन्य कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन एवं बचाव कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। मॉक ड्रिल का आयोजन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के अनुरोध पर किया गया। शासन स्तर से प्राप्त निर्देशों के क्रम में अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा किसी भी आकस्मिक घटना से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. सोमनाथ भी मौजूद रहे और उन्होंने पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम का अवलोकन किया। अग्निशमन विभाग की टीम ने अस्पताल परिसर में आग लगने की काल्पनिक स्थिति तैयार कर बचाव अभियान का प्रदर्शन किया। इस दौरान बताया गया कि आग लगने की सूचना मिलते ही किस प्रकार बिना घबराए तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना देनी चाहिए, मरीजों को सुरक्षित स्थान पर कैसे पहुंचाया जाए, ऑक्सीजन युक्त वार्डों में किस प्रकार अतिरिक्त सावधानी बरती जाए तथा शुरुआती आग पर अग्निशमन यंत्रों की सहायता से कैसे नियंत्रण पाया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सकों एवं कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्रों के संचालन की विधि, धुएं से बचाव के उपाय, आपातकालीन निकासी मार्गों का उपयोग, घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने की तकनीक तथा आपदा के समय समन्वित कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने सभी कर्मचारियों से कहा कि किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय संयम एवं सूझबूझ के साथ कार्य करना ही सबसे बड़ा बचाव है। मॉक ड्रिल के दौरान अस्पताल के विभिन्न वार्डों, इमरजेंसी, ओपीडी, सीढ़ियों, निकासी मार्गों तथा फायर सेफ्टी उपकरणों का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म सिस्टम तथा अन्य सुरक्षा संसाधनों की उपयोगिता की जानकारी देते हुए समय-समय पर उनकी जांच और रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. सोमनाथ ने कहा कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ चिकित्सकों और कर्मचारियों का प्रशिक्षित होना भी अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की मॉक ड्रिल कर्मचारियों में आत्मविश्वास बढ़ाती है और किसी भी अप्रत्याशित घटना की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करती है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ रमेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप अस्पतालों में नियमित रूप से आपदा प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रत्येक कर्मचारी आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से निभा सके। उन्होंने अग्निशमन विभाग की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से अस्पताल की आपदा प्रबंधन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। मॉक ड्रिल के उपरांत शासन के निर्देशानुसार कार्यक्रम की जियोटैग फोटोग्राफ एवं आवश्यक विवरण ऑनलाइन गूगल शीट पर अपलोड किए गए। कार्यक्रम में चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टाफ, सुरक्षा कर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लेकर आपदा प्रबंधन की बारीकियों को समझा और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। अस्पताल प्रशासन ने भविष्य में भी नियमित अंतराल पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प दोहराया, ताकि मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा हर परिस्थिति में सुनिश्चित की जा सके। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
