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इंदुर्खी (रौन) - आयुर्वैदिक स्वास्थ्य केंद्र पर ताले की शिकायतें, मरीज परेशान
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    25 Jun 2026 19:48 PM



  • इंदुर्खी आयुर्वैदिक स्वास्थ्य केंद्र पर लटका रहता है ताला, इलाज को भटक रहे मरीज
  • डॉक्टर और स्टाफ पर अनियमितता के आरोप, ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से की कार्रवाई की मांग
  • करोड़ों की नई बिल्डिंग बन रही, लेकिन पुराने स्वास्थ्य केंद्र में नहीं मिल रहीं सेवाएं
  • स्वास्थ्य केंद्र बंद रहने से निजी अस्पतालों का सहारा लेने को मजबूर ग्रामीण
  • रौन ब्लॉक के इंदुर्खी में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, मरीजों ने सुनाई अपनी परेशानी
  • 'अस्पताल में ताला, मरीज बेहाल'—ग्रामीणों ने जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग

भिण्ड। रौन ब्लॉक के ग्राम पंचायत इंदुर्खी में स्थित आयुर्वैदिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीज और ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि केंद्र पर अक्सर ताला लटका मिलता है और डॉक्टर समय पर नहीं आते, जिससे बीमार लोगों को इलाज के लिए लगातार समस्या का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत आयुर्वैदिक चिकित्सक रविन्द्र कुमार चैरे तथा अन्य स्टाफ कृ रेखा चैहान और विनोद सिंह राजपूत कृ मौजूद होने के बावजूद केंद्र बंद रहता है और मरीजों को दरवाजे पर ही लौटना पड़ता है।

स्थानीय रामवीर ने बताया, कि वह कई बार बीमारी होने पर दिखाने गया, लेकिन हमेशा ताला लगा हुआ मिलता है। राजेश ने कहा कि उसे सांस फूलना और घबराहट की शिकायत रहती है। जब वह केंद्र पर गया तो बार-बार ताला देखकर निराश हुआ। राजेश का कहना है कि केंद्र पर जो डॉक्टर तैनात हैं वही अपनी सुविधा के अनुसार आते हैं और मरीजों की परेशानी की कोई चिंता नहीं करते। लोग यह भी कहते हैं कि जब से नया स्टाफ आया है तब से केंद्र पर ताला की यह स्थिति बनी हुई है, जबकि तीन कर्मचारी मौजूद हैं लेकिन केन्द्र को नियमित रूप से नहीं चलाया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि आयुर्वैदिक अस्पताल की नई बिल्डिंग करोड़ों रुपए की लागत से बन रही है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद यदि स्वास्थ्य केन्द्र पर ताला ही लटका रहेगा तो करोड़ों रुपए खर्च करने की क्या आवश्यकता थी। वे सवाल उठाते हैं कि यदि सुविधा और स्टाफ मौजूद है तो सेवाओं का संचालन क्यों नहीं हो रहा और जनता को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में स्थानीय प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की क्या भूमिका है।

कई ग्रामीणों ने बताया, कि अस्पताल के ताले और अनियमितता के कारण लोग निजी चिकित्सकों और दूर के सरकारी अस्पतालों की ओर जाने को मजबूर हो रहे हैं। इससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और आपातकालीन स्थितियों में समय पर इलाज न मिलने का जोखिम भी बना रहता है। सामाजिक सदस्यों ने आशंका जतायी कि स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र का अपयोग व सुचारु संचालन सुनिश्चित करने में अनदेखी जारी रही तो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव होगा।

स्थानीय लोगों ने जिला एवं ब्लॉक प्रशासन से शीघ्र जांच और अविलंब कार्रवाई की मांग की है। वे चाह रहे हैं कि स्वास्थ्य केन्द्र में तैनात कर्मचारियों की उपस्थिति व कर्तव्यों का सत्यापन किया जाए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो नियमों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी। साथ ही ग्रामीण प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि नए बन रही बिल्डिंग का उपयोग शीघ्र आरंभ कर लोगों को नियमित और विश्वसनीय आयुर्वैदिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएं। यह मामला स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चुनौती है क्योंकि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्थानीय जनता के लिए जीवन रक्षक सेवाओं में से एक होते हैं। अब देखना होगा कि अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और कब तक इंदुर्खी के लोगों को इस समस्या से मुक्ति मिलती है। देखे भिंड से विमलेश की रिपोट 

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