फास्ट न्यूज इंडिया यूपी हरदोई/बिलग्राम। बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र के डाभा गांव में गुरुवार सुबह एक 13 वर्षीय किशोरी ने अपने भाई की डांट से नाराज होकर फंदा लगाने का प्रयास किया। परिजनों की सतर्कता से उसकी जान बचा ली गई, लेकिन गंभीर हालत के कारण उसे प्राथमिक उपचार के बाद लखनऊ रेफर किया गया है।
गांव निवासी सुशीला ने बताया कि उनके पति मंगतराम का पांच वर्ष पूर्व बीमारी से निधन हो गया था। वह अपने चार बेटों और तीन बेटियों की परवरिश अकेले कर रही हैं। उनकी तीसरे नंबर की बेटी कालिंद्री (13) ने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद स्कूल छोड़ दिया था और घर के कामों में हाथ बंटाती है। सुशीला का बड़ा बेटा हीरा कानपुर की एक गुटखा फैक्ट्री में कार्यरत है।
हाल ही में मां सुशीला को कालिंद्री की कुछ गतिविधियों के बारे में पता चला था। इस संबंध में उन्होंने कानपुर में रह रहे अपने बड़े बेटे हीरा से बात की। गुरुवार सुबह करीब 9 बजे, भाई हीरा ने फोन पर कालिंद्री को डांटते हुए सुधरने की नसीहत दी। भाई की यह डांट कालिंद्री को इतनी बुरी लगी कि उसने यह कदम उठाया।
भाई से फोन पर डांट सुनने के बाद नाराज कालिंद्री कमरे में चली गई और दुपट्टे के सहारे फंदा लगा लिया।
इसी दौरान बरामदे में काम कर रही उसकी छोटी बहन सरस्वती को कमरे से कुछ असामान्य आवाजें सुनाई दीं। भीतर जाने पर उसने कालिंद्री को फंदे पर लटका देखा और शोर मचाया।
सरस्वती की आवाज सुनकर घर के अन्य सदस्य तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत कालिंद्री को फंदे से नीचे उतारा। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं।
परिजनों ने तत्काल एम्बुलेंस बुलाई और कालिंद्री को बिलग्राम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले गए। वहां डॉक्टर ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में प्राथमिक उपचार के बाद भी कालिंद्री की गंभीर स्थिति बनी रही, जिसके बाद डॉक्टर ने उसे बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के एक उच्च संस्थान में रेफर कर दिया है। रिपोर्ट चन्दन यादव 151137475
