फास्ट न्यूज़ इंडिया मध्य प्रदेश शिवपुरी पिछोर! प्रदेश सरकार द्वारा बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन पिछोर विकासखंड में इस अभियान की जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। मंगलवार को निरीक्षण के दौरान विकासखंड के सात शासकीय विद्यालय बंद मिले, जहां स्कूल समय में ताले लटके हुए पाए गए। इस स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार शासकीय प्राथमिक विद्यालय हरीनगर (खार्गवाहा), शासकीय प्राथमिक विद्यालय रतनपुर, शासकीय प्राथमिक विद्यालय टपरियन, शासकीय माध्यमिक विद्यालय पाएगा, शासकीय प्राथमिक विद्यालय रामनगर, शासकीय प्राथमिक विद्यालय रिझउआ एवं शासकीय प्राथमिक विद्यालय मानिकपुर निरीक्षण के दौरान बंद मिले।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षकों की लापरवाही और अनियमितता का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शासन द्वारा विद्यालयों के नियमित संचालन के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, इसके बावजूद स्कूलों का बंद मिलना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को स्कूलों तक पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर अभियान चला रही है, तब विद्यालयों में ताले क्यों लटके हुए हैं? यदि विद्यालय ही समय पर नहीं खुलेंगे तो बच्चों का भविष्य कैसे संवरेगा?
मामले में पक्ष जानने के लिए पिछोर बीआरसी सुरेश गुप्ता से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में विभाग का पक्ष सामने नहीं आ सका।
अब क्षेत्र के अभिभावकों और ग्रामीणों की मांग है कि बंद मिले विद्यालयों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार शिक्षकों एवं अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके।। रिपोर्टर राजू जाटव पिछोर
