- सांसद संध्या राय ने सुनी चंबल की सांस्कृतिक विरासत की आवाज
- गौ-हद धाम और श्रीकृष्ण गमन पथ विस्तार अभियान को मिला समर्थन
- लोकसभा में मुद्दा उठाने का सांसद संध्या राय ने दिया आश्वासन
- चंबल की धरोहरों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग तेज
- गोहद को ‘मध्यप्रदेश का वृंदावन’ बनाने की पहल पर चर्चा
- सांस्कृतिक पर्यटन परिपथ विकसित करने का सुझाव सांसद को सौंपा गया
भिंड। चंबल अंचल की सांस्कृतिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से चल रहे गौ-हद धाम एवं श्रीकृष्ण गमन पथ विस्तार अभियान को उस समय महत्वपूर्ण बल मिला, जब भिंड-दतिया लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती संध्या राय से प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात कर विस्तृत चर्चा की।
प्रतिनिधि मंडल ने सांसद को गोहद (गौ-हद धाम), क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों, देवस्थानी संपत्तियों, चंबल अंचल की सांस्कृतिक धरोहरों तथा श्रीकृष्ण गमन पथ योजना से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा। प्रतिनिधियों ने क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सांसद संध्या राय ने विषय को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि चंबल अंचल की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा इसे उचित सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस विषय को लोकसभा में प्रश्न के माध्यम से उठाने का प्रयास करेंगी और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित मंत्रालयों एवं केंद्र सरकार के समक्ष भी रखेंगी।
उन्होंने कहा कि भिंड-दतिया क्षेत्र केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी समृद्ध है। क्षेत्र की विरासत, पर्यटन संभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
प्रतिनिधि मंडल ने सांसद को बताया कि गोहद में अनेक प्राचीन मंदिर, धार्मिक संस्थान और देवस्थानी संपत्तियां मौजूद हैं। स्थानीय जनश्रुतियों और संत परंपराओं में गोहद को “गौ-हद” और “मध्यप्रदेश का वृंदावन” कहा जाता है। इसके साथ ही दंदरौआ धाम, रावतपुरा सरकार धाम, पीताम्बरा शक्ति पीठ, मितावली, पढ़ावली, काकनमठ, अटेर किला, कुंतलपुर और कर्ण कुंड जैसे स्थलों को जोड़कर एक सांस्कृतिक पर्यटन परिपथ विकसित करने का सुझाव भी प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर प्रतिनिधि मंडल में कवि गौरव राज सोनी (तेजस्वी), पुखराज भटेले, एडवोकेट नारायण शर्मा, श्रीकांत सोनी सहित पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और धर्मप्रेमी नागरिक उपस्थित रहे।
बैठक के बाद उपस्थित लोगों ने विश्वास जताया कि जनप्रतिनिधियों, संत समाज और आम जनता के सामूहिक प्रयासों से चंबल अंचल की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी और क्षेत्र के धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। देखे विमलेश की रिपोट
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