मथुरा। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा एवीजी लॉजिस्टिक्स के साथ पार्सल परिवहन एवं वितरण सेवाओं के संचालन हेतु पांच वर्ष का अनुबंध किया गया था। इस साझेदारी का उद्देश्य पार्सल वितरण प्रणाली को अधिक कुशल, सुरक्षित, पारदर्शी एवं भरोसेमंद बनाना था, जिससे प्रदेश में वस्तुओं की आवाजाही को बढ़ावा मिले तथा आर्थिक गतिविधियों को गति प्राप्त हो।
वर्तमान में संचालित पार्सल कार्यालयों की स्थिति अनुबंध की मूल भावना एवं निर्धारित मानकों के विपरीत दिखाई दे रही है। प्राप्त शिकायतों एवं निरीक्षण के दौरान यह पाया गया है कि अधिकांश पार्सल कार्यालयों में सामान का सही वजन करने हेतु प्रमाणित उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। सामान की सुरक्षा जांच के लिए मेटल डिटेक्टर अथवा स्कैनर जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं भी नहीं हैं, जिसके कारण प्रतिबंधित एवं संदिग्ध वस्तुओं की ढुलाई को प्रभावी रूप से रोकना संभव नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति यात्रियों एवं परिवहन व्यवस्था की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि जिन बसों में पार्सल भेजे जाते हैं, उन्हीं बसों में यात्री भी यात्रा करते हैं।
इसके अतिरिक्त पार्सलों की ट्रैकिंग के लिए बारकोड स्कैनर एवं आधुनिक ट्रैकिंग प्रणाली का अभाव पाया गया है, जबकि ऐसी सुविधाएं पारदर्शी एवं जवाबदेह सेवा संचालन के लिए आवश्यक हैं। पार्सल कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के पास पहचान पत्र (आई-कार्ड) भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे ग्राहकों को यह पता नहीं चल पाता कि वे अधिकृत कर्मचारी से ही संपर्क कर रहे हैं।
शिकायतें यह भी प्राप्त हुई हैं कि पार्सल बुकिंग के दौरान वजन में अनियमितताएं की जा रही हैं तथा निर्धारित शुल्क से अधिक धनराशि वसूली जा रही है। इतना ही नहीं, परिवहन निगम के चेकिंग अधिकारियों के समक्ष भी गलत वजन दर्ज कर बुकिंग किए जाने के आरोप सामने आए हैं। यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह न केवल उपभोक्ता हितों का उल्लंघन है बल्कि अनुबंध की शर्तों का भी स्पष्ट उल्लंघन है।
व्यापारियों एवं ग्राहकों की एक प्रमुख शिकायत यह भी है कि पार्सल बुकिंग के बाद उन्हें विधिवत रसीद उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यापारी द्वारा ₹500 का पार्सल शुल्क जमा किया जाता है तो उसकी अधिकृत रसीद अवश्य दी जानी चाहिए, किन्तु वर्तमान में अनेक मामलों में रसीद जारी नहीं की जा रही है। इससे वित्तीय अनियमितताओं एवं राजस्व हानि की आशंका उत्पन्न होती है।
पार्सल कार्यालयों में शुल्क निर्धारण संबंधी रेट लिस्ट भी प्रदर्शित नहीं की गई है। विभिन्न वजन एवं दूरी के अनुसार देय भाड़े की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न होने के कारण ग्राहकों को सही शुल्क की जानकारी नहीं मिल पाती तथा मनमानी वसूली की संभावना बनी रहती है।
उपरोक्त तथ्यों के आलोक में संपूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष जांच एवं अनुबंध की शर्तों के अनुपालन की समीक्षा आवश्यक प्रतीत होती है। यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही पार्सल सेवाओं में पारदर्शिता, सुरक्षा एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता भी अपेक्षित है, जिससे व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहे।
रिपोर्ट नंद किशोर शर्मा 151170853
