बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। कहीं 30 तो कहीं 60 छात्रों पर सिर्फ एक ही शिक्षक हैं। जबकि सामान्य अनुपात 25 छात्रों पर एक शिक्षक का होना चाहिए। वहीं, माध्यमिक में जिले में इस सत्र में भी उधार के ही गुरुजी क्लास लेंगे। यही नहीं काशी में एक ही साल में 14541 नामांकन घट गए हैं। जौनपुर और गाजीपुर की स्थिति खराब
बेसिक शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा खराब स्थिति जौनपुर और गाजीपुर में है। आठ विद्यालयों में गणित, सात में विज्ञान और छह में कंप्यूटर के शिक्षक नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार शासन से शिक्षकों की मांग की गई है। तैनाती होने तक यह समस्या बरकरार रहेगी। गाजीपुर में पिछले साल 50996 के मुकाबले इस बार 35510 नामांकन ही हुए हैं। ऐसे ही चंदौली में महज 22918 और जौनपुर में 54153 नामांकन हुए हैं।
काशी में 29 छात्रों पर एक शिक्षक
किसी भी विद्यालय में नई शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात 25:1 होना चाहिए, लेकिन वाराणसी मंडल के किसी भी जिले में इसका पालन नहीं हो रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी छात्र-शिक्षक अनुपात डेटा वाराणसी में 29:1 है। विभाग को उम्मीद थी पिछले शैक्षणिक सत्र में इन शिक्षकों की कमी पूरी हो जाएगी लेकिन बोर्ड परीक्षाएं बीतने तक भी स्थिति जस की तस है। इन विद्यालयों के लिए शिक्षकों की भर्ती परीक्षा तो हुई है लेकिन अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इस शैक्षणिक सत्र में भी इन शिक्षकों की कमी पूरी होने के आसार नहीं हैं।पिछले सत्र में 46197 नामांकन हुए थे। इसके मुकाबले इस बार महज 31656 नामांकन ही हुए हैं। हालांकि, यह आंकड़ा पूर्वांचल के दूसरे जिलों से फिर भी ठीक है। काशी के सात राजकीय विद्यालयों में गणित और विज्ञान दोनों प्रमुख विषयों के शिक्षक नहीं हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख विषयों के लिए विद्यालयों को अतिरिक्त शिक्षक की व्यवस्था करनी पड़ रही है। छात्रों का कोर्स जैसे-तैसे पूरा कराया जाता है।चंदौली और भदोही में 45 फीसदी से भी कम नामांकन
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी छात्र-शिक्षक अनुपात डेटा में सबसे खराब स्थिति जौनपुर और गाजीपुर की है। जौनपुर में छात्र-शिक्षक अनुपात 36:1 और गाजीपुर की 35:1 है। वहीं, चंदौली की 32:1 और वाराणसी की 29:1 है। जौनपुर में करीब 2.50 लाख छात्र परिषदीय विद्यालयों में पढ़ते हैं। विभागीय रिपोर्ट बताती है कि सभी जिलों में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की बड़ी कमी है। यही कारण है कि विद्यालयों में बच्चे निपुण नहीं हो पा रहे हैं और नामांकन दिन प्रतिदिन घटता जा रहा है। इस बार मंडल के चंदौली और भदोही में नामांकन 45 प्रतिशत से भी कम है।इन राजकीय विद्यालयों में है शिक्षकों की कमी
प्रभु नारायण राजकीय इंटर कॉलेज रामनगर
राजकीय हाईस्कूल भैठौली हरहुआ
राजकीय हाईस्कूल भिखारीपुर राजातालाब
राजकीय हाईस्कूल खरगूपुर सेवापुरी
राजकीय हाईस्कूल भतसार, आराजी लाईन
राजकीय हाईस्कूल बेसहूपुर, सेवापुरी
राजकीय हाईस्कूल बेलारी पिंडरा
पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज
राजकीय हाईस्कूल हसनपुर बड़ागांव
राजकीय हाईस्कूल महगांव आराजी लाईन
राजकीय हाईस्कूल चितईपुर पिंडरा
राजकीय हाईस्कूल लालपुर सेवापुरीअधिकारी बोले
इस सत्र की शुरुआत से मंडल में नामांकन की प्रगति बहुत अच्छी नहीं है। बीते दिनों समीक्षा कर 90 विद्यालयों के 250 से अधिक शिक्षकों का वेतन रोका गया था। विद्यालयों के फिर से खुलने पर नामांकन के लिए अभिभावकों से संपर्क कर इसे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। -हेमंत राव, एडी बेसिक, वाराणसी
राजकीय विद्यालयों में बीच-बीच में हो रही तैनाती से बहुत हद तक शिक्षकों की कमी पूरी हो गई है। इस सत्र के बीच ही कुछ नए शिक्षक विद्यालयों को मिल जाएंगे। जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, वहां व्यवस्था कराई जाती है। जल्द ही वहां भी तैनाती होगी। -भोलेंद्र प्रताप सिंह, डीआईओएस रिपोट - विपिन चंद मौर्या 151045502
