फास्ट न्यूज़ इंडिया मध्य प्रदेश शिवपुरी पिछोर। देश की स्वतंत्रता संग्राम की अमर वीरांगना, अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रतीक महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर जहां देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए, वहीं पिछोर नगर में उनकी प्रतिमा की अनदेखी चर्चा का विषय बन गई। नगर के प्रमुख एवं व्यस्ततम चौराहों में शामिल महारानी लक्ष्मीबाई चौराहा (डाक बंगला चौराहा) स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा पर बलिदान दिवस के अवसर पर न तो साफ-सफाई की गई और न ही किसी प्रकार का श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
नगरवासियों के अनुसार बलिदान दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रतिमा स्थल पर कोई विशेष व्यवस्था देखने को नहीं मिली। प्रतिमा पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि, दीप प्रज्ज्वलन अथवा सजावट जैसी परंपरागत गतिविधियां नहीं हुईं। शाम तक प्रतिमा स्थल पर न तो रोशनी की विशेष व्यवस्था की गई और न ही किसी सामाजिक, राजनीतिक अथवा प्रशासनिक संगठन द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इससे स्थानीय लोगों में निराशा और असंतोष का माहौल देखने को मिला।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि महारानी लक्ष्मीबाई केवल इतिहास का एक नाम नहीं हैं, बल्कि वे देश की महिलाओं और युवाओं के लिए साहस, त्याग और स्वाभिमान की जीवंत प्रेरणा हैं। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उन्होंने जो वीरता दिखाई, वह भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज है। ऐसे महान व्यक्तित्व के बलिदान दिवस पर उनके सम्मान में कोई आयोजन न होना दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को दर्शाता है।
नगरवासियों ने बताया कि जिस स्थान पर महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापित है, वहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। यदि बलिदान दिवस पर प्रतिमा की साफ-सफाई कर फूल-मालाओं से सजाया जाता तथा श्रद्धांजलि सभा या दीप प्रज्ज्वलन का आयोजन किया जाता तो यह उनके प्रति सच्चे सम्मान का प्रतीक होता। लेकिन पूरे दिन प्रतिमा स्थल पर सन्नाटा पसरा रहा और किसी प्रकार की गतिविधि नजर नहीं आई।
लोगों का यह भी कहना है कि नगर में अन्य राष्ट्रीय पर्वों, महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथियों पर विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्रशासन, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से भागीदारी निभाते हैं, लेकिन महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर ऐसा कोई आयोजन नहीं होना आश्चर्यजनक है। इससे लोगों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि राष्ट्र के महान नायकों और वीरांगनाओं के सम्मान के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
नगर के बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि भविष्य में महारानी लक्ष्मीबाई सहित सभी राष्ट्रनायकों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के जयंती और बलिदान दिवस पर सम्मानजनक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। प्रतिमा स्थलों की नियमित साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धांजलि समारोह सुनिश्चित किए जाएं, ताकि नई पीढ़ी को उनके आदर्शों और बलिदान से प्रेरणा मिल सके।
महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर पिछोर में दिखाई दी यह उदासीनता अब नगरवासियों के बीच चर्चा और नाराजगी का विषय बनी हुई है। लोगों का मानना है कि यह केवल एक प्रतिमा की उपेक्षा नहीं, बल्कि उस गौरवशाली इतिहास की अनदेखी है जिसने देश को स्वतंत्रता की राह दिखाई। रिपोर्टर राजू जाटव पिछोर
