नई दिल्ली। डॉक्टर की पर्ची के बिना अब कफ सिरप बाजार में नहीं विकेंगे। हाल की घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के मद्देनजर कफ सिरप यानी खांसी की दवा समेत सिरप आधारित दवाओं की विक्री के नियम सख्त कर दिए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सिरप की बिक्री और वितरण को डॉक्टर के पर्चे व लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी के दायरे में लाने का फैसला किया है। मंत्रालय ने बताया, पहले इग्स रूल्स की अनुसूची के के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में कफ सिरप की बिक्री के लिए कुछ खुदरा लाइसेंस संबंधी प्रावधानों से छूट दी गईथी। अब उसमें से सिरप शब्द हटा दिया गया है। गांवों में भी कफ सिरप सिर्फ लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानों से ही बेचे जा सकेंगे। यह व्यवस्था ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और उसके तहत बने नियमों के अनुसार लागू होगी। मंत्रालय ने कहा, नए नियमों से कफ सिरप की बिक्री और वितरण अधिक जिम्मेदारी से होगा। ब्यूरोसरकार ने मांगे थे सुझाव: केंद्र सरकार ने इस संबंध में हितधारकों से आपत्तियां व सुझाव मांगे थे। विचार विमर्श के बाद संशोधित नियम लागू किए गए हैं। हाल में कई देशों में दूषित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के बाद कफ सिरप और अन्य तरल दवाओं की गुणवत्ता को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी है।