उत्तराखंड, विकासखंड गदरपुर के खटोला गांव में एक्शनएड एसोसिएशन संस्था की ओर से बाल विवाह रोकथाम को लेकर जनजागरुकता अभियान चलाया गया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने बाल विवाह मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया।रविवार को एक्शनएड एसोसिएशन द्वारा बाल विवाह के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद के सदस्य एवं अधिवक्ता मुकेश सिंह राणा द्वारा की गई। मुख्य अतिथि अधिवक्ता मुकेश सिंह राणा ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई और गैरकानूनी कृत्य है, जो बालिकाओं को उनक बुनियादी अधिकारों से वंचित कर देता है और उन्हें जीवनभर के लिए असुरक्षित बना देता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह महिलाओं के खिलाफ हिंसा का एक रूप है, जो उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और विकास में बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने बताया कि कम उम्र में गर्भधारण और प्रसव के कारण मातृ एवं शिशु मृत्यु दर बढ़ने का खतरा रहता है। भारत में विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं एक्शनएड एसोसिएशन की हीरा जंगपांगी रौतेला ने बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु में किया गया विवाह बाल विवाह है और यह एक कानूनी अपराध है। इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है तथा वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने बताया कि बाल विवाह की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को दो वर्ष तक का कारावास या एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन, स्थानीय थाना, महिला एवं बाल विकास विभाग या अन्य संबंधित प्राधिकरण को सूचना दी जा सकती है। यहां उमा पानू, धर्म सिंह, दीपा देवी, रूपा, जानकी, लक्ष्मी, अनीता, मंगो देवी, अजय, रोहित, शिवा सिंह, भूरो देवी, कमलेश, गीता, किरण, लीलावती रहे।

