फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। दिव्यांगता विषय पर आधारित विश्व के प्रथम वृहद ग्रंथ "साहित्य और दिव्यांग संवेदना" के प्रकाशन के साथ ही जनपद प्रतापगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक डॉ. दयाराम मौर्य 'रत्न' ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम दर्ज कराई है। इस वैश्विक ग्रंथ में उनके पांच शोधपरक आलेख प्रकाशित किए गए हैं, जिससे साहित्यिक जगत में हर्ष का माहौल है। तीन खंडों और लगभग 1200 पृष्ठों में प्रकाशित इस विश्वस्तरीय ग्रंथ का संपादन चंडीगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार एवं पूर्व कुलपति डॉ. अमर सिंह वधान ने किया है। ग्रंथ में दिव्यांगता विषयक विविध आयामों को समेटते हुए विश्वभर के विद्वानों के शोध एवं विचारों को स्थान दिया गया है। डॉ. दयाराम मौर्य 'रत्न' के प्रकाशित शोध आलेखों में "हिन्दी साहित्य में दिव्यांग संवेदना", "अवधी भाषा की लोकोक्तियों में दिव्यांगता संदर्भ" तथा "दिव्यांग जिन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी" जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। उनके आलेख दिव्यांग विमर्श को नई दृष्टि प्रदान करते हैं तथा समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाने का कार्य करते हैं। ग्रंथ की विशेषता यह है कि इसमें प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक के दिव्यांग साहित्यकारों, लेखकों, दार्शनिकों, वैज्ञानिकों, आविष्कारकों, खिलाड़ियों, उद्योगपतियों, प्रशासकों और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों का विस्तृत परिचय और योगदान समाहित किया गया है। इस वैश्विक परियोजना के लिए विश्व के 95 विभिन्न भाषाई क्षेत्रों के विद्वानों से सामग्री संकलित की गई, जिनमें प्रतापगढ़ के डॉ. दयाराम मौर्य 'रत्न' भी प्रमुख रूप से शामिल रहे। डॉ. रत्न की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर समाजसेवी रोशनलाल ऊमरवैश्य, साहित्यकार हरीलाल मिलन, विज्ञान लेखक विजय चितौरी, आनन्द मोहन ओझा, राजीव कुमार आर्य, राधेश्याम दीवाना, प्रेमकुमार त्रिपाठी 'प्रेम', राम लखन प्रजापति, कुंजबिहारी लाल मौर्य 'काकाश्री', श्रीनाथ मौर्य 'सरस', अनिल कुमार निलय तथा राकेश कनौजिया सहित अनेक प्रबुद्धजनों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। साहित्य और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में डॉ. दयाराम मौर्य 'रत्न' की यह उपलब्धि प्रतापगढ़ के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
