मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सीपी सिंह कुशवाहा ने बताया कि पशुपालन विभाग द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर एवं बेरोजगार परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने तथा उनकी आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से बकरी पालन योजना (अनुदान संख्या-15) संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत सीमांत कृषकों, भूमिहीन मजदूरों, विधवा एवं निराश्रित महिलाओं सहित पात्र लाभार्थियों को बकरी पालन हेतु अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना का उद्देश्य बकरी पालन को बढ़ावा देकर ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना, कुपोषण में कमी लाना तथा बकरी के दूध एवं मांस उत्पादन में वृद्धि करना है। इससे लाभार्थियों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार होगा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। जनपद मऊ में इस योजना के अंतर्गत कुल 10 लाभार्थियों का चयन किया जाना है।
योजना के तहत प्रति इकाई 05 मादा एवं 01 नर बकरी प्रदान की जाएगी। बकरियों की खरीद राजकीय एवं भारत सरकार के बकरी प्रक्षेत्रों से की जाएगी। यदि वहां उपलब्धता न हो तो क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारी के पर्यवेक्षण में स्थानीय बाजार से भी क्रय किया जा सकेगा।
योजना की कुल लागत 60,000 रुपये निर्धारित है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 90 प्रतिशत अर्थात 54,000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा, जबकि लाभार्थी को 10 प्रतिशत अर्थात 6,000 रुपये स्वयं वहन करना होगा।
योजना के लिए 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वर्गों के निवासी आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया में भूमिहीन महिला एवं पुरुष, विधवा, निराश्रित महिला तथा बेरोजगार परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही उपलब्धतानुसार 3 प्रतिशत दिव्यांगजन को भी योजना में सम्मिलित किया जाएगा। बकरी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों को वरीयता प्रदान की जाएगी।
आवेदन के साथ आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति (जिसमें न्यूनतम 6,000 रुपये उपलब्ध हों), बकरी पालन प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र (यदि उपलब्ध हो) तथा बकरी इकाई को न्यूनतम तीन वर्ष तक संचालित करने संबंधी 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर शपथ-पत्र संलग्न करना आवश्यक होगा।
इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन पत्र मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय अथवा अपने निकटतम पशु चिकित्सालय से प्राप्त कर सकते हैं। रिपोट - अजय कुमार 151170379
