सरकारी नौकरी और ठेके दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी के आरोपी फर्जी आईएएस और उसके गिरोह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। अब पुलिस उनकी चल-अचल संपत्तियों की भी जांच कर रही है
दरअसल, यह मामला उस समय चर्चा में आया था, जब वर्ष 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एक कारोबारी के पास से रेलवे स्टेशन पर करीब एक करोड़ रुपये बरामद हुए थे। जांच के दौरान ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। जांच में सामने आया था कि फर्जी आईएएस ने टेंडर के नाम पर भी कारोबारी से रुपये लिए थे।
कारोबारी मुकुंद माधव की तहरीर पर गुलरिहा पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर 10 दिसंबर 2025 को बिहार के सीतामढ़ी निवासी ललित किशोर, उसके साले अभिषेक कुमार और गोरखनाथ क्षेत्र के लच्छीपुर निवासी परमानंद गुप्ता को गिरफ्तार किया था।
तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4.15 लाख रुपये नकद, लाखों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण, फर्जी पहचान पत्र, कूटरचित दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की थी। जांच में सामने आया कि गिरोह का सरगना ललित किशोर खुद को 'गौरव कुमार सिंह' नामक आईएएस अधिकारी बताकर लोगों को प्रभावित करता था।
उसका साला अभिषेक कुमार खुद को आईएएस का स्टेनो और परमानंद गुप्ता गनर बताकर भरोसा जीतते थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह सरकारी विभागों में पहुंच और प्रभाव का दावा कर बेरोजगार युवाओं और कारोबारियों को नौकरी और ठेका दिलाने का लालच देता था।
विश्वास पैदा करने के लिए फर्जी व्हाट्सएप चैट, नकली पहचान पत्र और सरकारी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। जांच में महराजगंज जिले के रामनयन गुप्ता का नाम भी सामने आया है। पुलिस का दावा है कि ठगी से अर्जित धन से उसके नाम पर 100 डिसमिल से अधिक जमीन खरीदी गई, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।
सीओ गोरखनाथ रवि कुमार सिंह ने बताया कि गैंगस्टर एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। गिरोह की संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है। रिपोर्ट फूलमती मौर्य 151188511
