जनआवाज का असर: मोती सागर तालाब से हटाई जा रही जलकुंभी, वर्षों पुरानी समस्या के समाधान की शुरुआत
पिछोर। नगर की पहचान और गौरव माने जाने वाले मोती सागर तालाब में फैली जलकुंभी को हटाने का कार्य शुरू हो गया है। लंबे समय से तालाब में जलकुंभी का अत्यधिक फैलाव होने के कारण यह समस्या नगरवासियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। जलकुंभी ने तालाब के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे तालाब की सुंदरता और उपयोगिता दोनों प्रभावित हो रही थीं।
इस मुद्दे को लेकर पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नगरवासियों द्वारा लगातार आवाज उठाई जाती रही। मोती सागर तालाब को पिछोर की शान बताते हुए इसकी सफाई की मांग लंबे समय से की जा रही थी। बढ़ती मांग और जनदबाव के बाद शिवपुरी कलेक्टर तथा नगर परिषद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और जलकुंभी हटाने की कार्रवाई शुरू कराई।
जानकारी के अनुसार, नगर परिषद द्वारा पूर्व में कई बार जलकुंभी हटाने के लिए टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन किसी एजेंसी द्वारा कार्य नहीं लिए जाने के कारण समस्या का समाधान नहीं हो सका। इसके चलते वर्षों से जलकुंभी लगातार बढ़ती रही।
अब प्रशासन की निगरानी में तालाब की सफाई का कार्य किया जा रहा है। प्रतिदिन करीब 20 से 25 मजदूर इस अभियान में जुटे हुए हैं तथा लगभग 30 से 35 ट्रॉली जलकुंभी तालाब से निकालकर हटाई जा रही है। हालांकि मोती सागर तालाब का क्षेत्रफल काफी बड़ा होने के कारण सफाई कार्य में कितना समय लगेगा, इसे लेकर अभी कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है।
नगरवासियों का कहना है कि यदि अभियान लगातार जारी रहा तो आने वाले समय में मोती सागर तालाब अपनी पुरानी सुंदरता वापस हासिल कर सकेगा। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सफाई के बाद भी तालाब के संरक्षण और नियमित देखरेख की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

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