- 25 करोड़ की जलवर्धन योजना फेल, 10 साल बाद भी प्यासा पिछोर
- हर घर पानी का दावा खोखला, कई वार्डों में आज भी पेयजल संकट
- आदिवासी बस्ती की महिलाओं को पानी के लिए तय करना पड़ता है 1 किमी का सफर
- टूटी पाइपलाइनें और उखड़ी सड़कें, जलवर्धन योजना पर उठे सवाल
- सीएमओ ने शासन को भेजे 25 पत्र, फिर भी नहीं सुलझी जल संकट की समस्या
- करोड़ों खर्च के बावजूद नहीं मिला लाभ, जलवर्धन योजना की जांच की मांग तेज
पिछोर। पिछोर नगर में करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई जलवर्धन योजना 10 साल बाद भी लोगों की प्यास नहीं बुझा सकी है। नगर के वार्ड क्रमांक 6, 11, 13,14 और 15 सहित कई क्षेत्रों में आज भी लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत और जनसुनवाई में आवेदन देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
पिछोर में जलवर्धन योजना के तहत हर घर तक आरओ युक्त पेयजल पहुंचाने का दावा किया गया था, लेकिन कई वार्डों में आज भी लोग पानी के लिए भटक रहे हैं। वार्ड 11 की आदिवासी बस्ती की महिलाओं का कहना है कि उन्हें पीने के पानी के लिए करीब एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। वहीं कई स्थानों पर पाइपलाइनें टूटी होने से पानी सड़कों पर बह रहा है और खोदी गई सड़कें भी अब तक नहीं सुधारी गई हैं।
इस मामले में नगर परिषद पिछोर के सीएमओ आनंद शर्मा का कहना है कि योजना की समस्याओं को लेकर शासन को 20 से 25 पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना का लाभ लोगों तक क्यों नहीं पहुंच पाया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी। फिलहाल नगरवासी योजना की जांच और पेयजल व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं देखे पिछोर से राजू जाटव की रिपोट
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