मथुरा। मथुरा-वृंदावन नगर निगम द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के अंतर्गत व्यापक प्रचार-प्रसार कर शहर को स्वच्छ बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन वार्ड संख्या 45 स्थित एमबीडीए अप्रूव्ड कॉलोनी कृष्णापुरम की वास्तविक स्थिति इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
नगर आयुक्त द्वारा सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं तथा सफाई कर्मचारियों को कार्य निष्पादन के लिए आवश्यक उपकरण एवं संसाधन भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके बावजूद धरातल पर इन आदेशों का पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान भी कॉलोनी में नियमित सफाई नहीं हो रही है। नालियां गंदगी से भरी हुई हैं, कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं तथा सफाई व्यवस्था पूरी तरह से लचर बनी हुई है। यदि सर्वेक्षण अवधि में ही यह स्थिति है, तो भविष्य में सफाई व्यवस्था की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
निवासियों के अनुसार संबंधित अधिकारियों द्वारा वार्ड का निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। वार्ड में सफाई कर्मचारियों की कमी अथवा सुपरवाइजर स्तर पर लापरवाही जैसी समस्याएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियां केवल कागजों तक सीमित हैं और वास्तविक धरातल पर अपेक्षित कार्य नहीं हो रहा है।
नगर निगम द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रचार-प्रसार पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन यदि इसी धनराशि का उचित उपयोग वार्डों की वास्तविक सफाई व्यवस्था सुधारने में किया जाए तो आम नागरिकों को गंदगी, दुर्गंध और संक्रमण जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है।
नगर आयुक्त एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा वार्ड संख्या 45, कृष्णापुरम कॉलोनी की सफाई व्यवस्था का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा नियमित सफाई सुनिश्चित कराई जाए, जिससे सरकार एवं नगर निगम की छवि धूमिल होने से बच सके और स्वच्छता सर्वेक्षण के उद्देश्य वास्तव में सफल हो सकें।
रिपोर्ट नंद किशोर शर्मा 151170853
