फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। रामानुज आश्रम के धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने नौतपा को लेकर लोगों के मन में फैल रही आशंकाओं और जिज्ञासाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नौतपा कोई भय का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन का महत्वपूर्ण काल है। उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी और संयम बरतने की अपील की। धर्माचार्य ने बताया कि जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तभी नौतपा की शुरुआत होती है। इस वर्ष 25 मई 2026 दिन रविवार को प्रातः 3 बजकर 44 मिनट पर सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 8 जून 2026 को दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ होगा। उन्होंने बताया कि 25 मई से 2 जून तक नौतपा का प्रभाव विशेष रूप से रहेगा।उन्होंने कहा कि भारतीय ज्योतिष और लोक परंपराओं में नौतपा का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि जितनी अधिक गर्मी नौतपा में पड़ती है, उतनी ही अच्छी वर्षा होने की संभावना रहती है। यही कारण है कि किसान वर्ग भी नौतपा को प्राकृतिक संतुलन और कृषि दृष्टि से महत्वपूर्ण मानता है।धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे ने कहा कि इस दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करें, धूप में अनावश्यक बाहर निकलने से बचें तथा शरीर को ठंडा रखने वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग करें। उन्होंने मसालेदार भोजन और बैंगन जैसी गर्म तासीर वाली चीजों से दूरी बनाने की सलाह दी।उन्होंने नौतपा से जुड़ी लोक कहावत का उल्लेख करते हुए बताया कि यदि नौतपा के दिनों में तेज गर्मी और लू नहीं चले, तो इसका असर प्रकृति और खेती दोनों पर पड़ता है। लोकमान्यता के अनुसार इससे कीट-पतंगों, चूहों और जहरीले जीवों की संख्या बढ़ सकती है तथा फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।धर्माचार्य ने कहा कि प्रकृति का हर परिवर्तन किसी न किसी संतुलन से जुड़ा होता है, इसलिए लू और गर्मी से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। सावधानी, संयम और ईश्वर में आस्था रखते हुए इस समय को सहज रूप से बिताना चाहिए।उन्होंने लोगों से धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलते हुए समाजहित के कार्यों में सक्रिय रहने की अपील की तथा कहा कि ईश्वर पर विश्वास रखने वालों का सदैव कल्याण होता है।धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने अंत में सभी के स्वस्थ और सुरक्षित रहने की कामना करते हुए कहा कि नौतपा प्रकृति का नियम है, इसे समझने और इसके अनुरूप जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता है। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
