- प्रयागराज की मुहीउद्दीनपुर गौशाला में विकास कार्यों को लेकर बढ़ा विवाद, पूर्व प्रधान पर गंभीर आरोप
- गौशाला निर्माण कार्य में बाधा और धमकी देने का आरोप, समिति सदस्यों ने उठाई आवाज
- पूर्णिमा सिंह ने भ्रष्टाचार के आरोपों को बताया निराधार
- अतिरिक्त शेड, बाउंड्री वॉल और नाली निर्माण को लेकर ग्राम पंचायत में मचा घमासान
- पूर्व प्रधान और पंचायत अधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई मुहीउद्दीनपुर गौशाला की राजनीति
- मुहीउद्दीनपुर गौशाला विवाद पर उठे सवाल, प्रशासनिक जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई
प्रयागराज के प्रतापपुर विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मुहीउद्दीनपुर से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां सरकारी गौशाला में कराए जा रहे विकास कार्यों को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। एक ओर कार्यवाहक प्रधान और समिति सदस्यों ने पूर्व प्रधान व ठेकेदार राजकुमार पटेल पर निर्माण कार्य में बाधा डालने, दबाव बनाने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, तो वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के आरोपों को ग्राम पंचायत अधिकारी ने पूरी तरह निराधार बताया है।
शिकायत के अनुसार, सरकार के निर्देशों पर गौशाला में पशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त शेड, बाउंड्री वॉल, नाली निर्माण और अन्य विकास कार्य कराए जा रहे थे। लेकिन आरोप है कि पूर्व प्रधान राजकुमार पटेल द्वारा इन कार्यों में लगातार हस्तक्षेप किया जा रहा है और समिति सदस्यों पर फर्जी भुगतान कराने का दबाव बनाया जा रहा है। शिकायत में मानसिक उत्पीड़न, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी तक देने के आरोप लगाए गए हैं।
वहीं इस पूरे मामले पर ग्राम पंचायत अधिकारी पूर्णिमा सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि गौशाला में अधिकारियों के निर्देशानुसार लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आंधी-तूफान में क्षतिग्रस्त हुए शेड और दीवारों का पुनर्निर्माण कराया गया है, पशुओं के लिए अतिरिक्त शेड बनाए गए हैं, भूसे का पर्याप्त भंडारण किया गया है और जलभराव रोकने के लिए नाली निर्माण कार्य भी जारी है।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्णिमा सिंह ने कहा कि लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उनके अनुसार कुछ लोग ग्राम पंचायत के सभी कार्य एक ही व्यक्ति को दिए जाने का दबाव बना रहे हैं, जबकि सरकारी व्यवस्था के अनुसार टेंडर प्रक्रिया के तहत कार्य आवंटित किए जाते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ निर्माण कार्य बिना कार्ययोजना और बिना जानकारी के कराए गए, जिनका भुगतान नियमों के तहत संभव नहीं है।
अब बड़ा सवाल यह है कि मुहीउद्दीनपुर गौशाला विवाद के पीछे वास्तविकता क्या है? क्या विकास कार्यों में अवरोध डाला जा रहा है या फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के पीछे कोई और वजह है? फिलहाल मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी। देखे प्रयागराज से प्रदीप मिश्रा की रिपोट

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