- चिरौना आंगनबाड़ी केंद्र पर ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
- डेढ़ साल से नियमित नहीं खुल रही आंगनबाड़ी, बच्चों का पोषण प्रभावित
- गर्भवती महिलाओं और बच्चों को नहीं मिल रहा समय पर पोषण आहार
- सुषमा शर्मा को विभाग की अंतिम चेतावनी
- बच्चों के भोजन में गड़बड़ी के आरोप, जांच की मांग तेज
- शिवपुरी के चिरौना गांव में आंगनबाड़ी व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
मध्य प्रदेश शिवपुरी । पिछोर खनियाधाना विकासखंड के ग्राम चिरौना में आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की आंगनबाड़ी करीब डेढ़ साल से नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही है, जिसके कारण बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाला पोषण आहार और दलिया समय पर नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें यह तक पता नहीं चलता कि आंगनबाड़ी केंद्र कब खुलता है और कब बंद हो जाता है। उनका कहना है कि पिछले एक से दो वर्षों में न तो बच्चों को नियमित भोजन मिला और न ही गर्भवती महिलाओं को शासन की योजनाओं का लाभ सही तरीके से दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों के हिस्से का पौष्टिक आहार बीच में ही गायब हो रहा है और जिम्मेदार लोग शासन की योजनाओं में लापरवाही बरत रहे हैं। इससे गांव के छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर सीधा असर पड़ रहा है।
मामले को लेकर जब महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित सहायिका सुषमा शर्मा को पहले भी नोटिस दिए जा चुके हैं। अब विभाग द्वारा अंतिम चेतावनी नोटिस जारी किया जाएगा। यदि कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित सहायिका को स्थायी रूप से निलंबित करने की कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि आंगनबाड़ी में भोजन बनाने का कार्य सहायिका के परिजनों से कराया जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध बताया जा रहा है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के हिस्से का पोषण आहार कब तक लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता रहेगा। देखे पिछोर से राजू जाटव की रिपोट

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