दुनिया में बढ़ते युद्ध, गहराते अंतरराष्ट्रीय तनाव और ऊर्जा संकट को लेकर वरिष्ठ समाजसेवी राजेश खुराना ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां मानवता के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होती जा रही हैं और यदि समय रहते हालात पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो पूरी दुनिया एक बार फिर महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और भुखमरी जैसे भयावह संकटों की चपेट में आ सकती है।
राजेश खुराना ने आगे कहा कि बीते कुछ वर्षों में दुनिया लगातार युद्धों, संघर्षों और आर्थिक अस्थिरता से गुजर रही है। अब ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है। इसका सीधा असर तेल, पेट्रोल, डीजल, गैस, उर्वरक और रासायनिक उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर पड़ा है, जिससे कई देशों में आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां से “महासंकट” की तस्वीर साफ दिखाई देने लगी है। पश्चिम एशिया में सुलग रही जंग की आग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने की ओर बढ़ रही है। यदि इस युद्ध को जल्द नहीं रोका गया, तो इंसानियत ने दशकों में विकास और समृद्धि के लिए जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे बर्बाद हो सकती हैं और करोड़ों लोग फिर से गरीबी और भुखमरी के दलदल में धंस सकते हैं।
ऊर्जा संकट ने विकसित देशों की भी उड़ाई नींद
श्री खुराना ने कहा कि ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है। इसका असर अब आम लोगों की जिंदगी पर भी साफ दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि विकसित देश भी इस समय महंगाई की मार झेल रहे हैं और ऊर्जा संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है।
उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर चिंता जताई और कहा कि इसके सामान्य नहीं होने से तेल और गैस आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इटली, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और जापान जैसे देशों की ऊर्जा व्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ा है। जापान को अपनी तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए आपातकालीन ऑयल रिजर्व तक खोलना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि वैश्विक बाजार में यूरिया और अमोनिया की कीमतों में 65 प्रतिशत तथा ब्यूटेन गैस में 51 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं अमेरिका में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें 44 से 48 प्रतिशत तक महंगी हो चुकी हैं।
दुनिया आर्थिक महामंदी की ओर बढ़ रही है
राजेश खुराना ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल तनाव कम होता दिखाई दे रहा है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई में रुकावट ने वैश्विक ऊर्जा संकट को और गंभीर बना दिया है। दोनों देश अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन विश्व समुदाय के सामने संकट लगातार गहराता जा रहा है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी कूटनीति इस समय पूरी तरह विफल और आत्ममुग्धता से ग्रस्त नजर आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वैश्विक तनाव और अस्थिरता को बढ़ाने में अमेरिका की नीतियों की बड़ी भूमिका रही है और इसकी कीमत पूरी दुनिया चुका रही है।
उन्होंने चेताया कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो पूरी दुनिया बड़े ऊर्जा संकट और आर्थिक मंदी का सामना करेगी। इसका असर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था तक दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने भी आशंका जताई है कि युद्ध और ऊर्जा संकट के चलते दुनिया के करोड़ों लोग भुखमरी का शिकार हो सकते हैं। भारत में भी इसका असर दिखाई देने लगा है और आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है।
ईंधन बचाएं, विदेशी मुद्रा बचाएं: राजेश खुराना की देशहित में अपील
अपने संदेश के अंत में वरिष्ठ समाजसेवी राजेश खुराना ने देशवासियों से ईंधन की बचत करने और विदेशी मुद्रा संरक्षण के प्रति जागरूक होने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संकट के लंबे दौर से बचने के लिए हर नागरिक को जिम्मेदारी के साथ संसाधनों का उपयोग करना होगा। आखिर में उन्होंने कहा कि यह समय केवल खाड़ी युद्ध संघर्ष रुकने के भरोसे बैठने का नहीं, बल्कि हर नागरिक के जागरूक और जिम्मेदार बनने का है, ताकि देश और दुनिया को संभावित आर्थिक और ऊर्जा महासंकट से बचाया जा सके।
रिपोर्ट नंद किशोर शर्मा 151170853
