मथुरा। मुख्यमंत्री ग्राम विकास योजना 2026 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में निजी स्तर पर संचालित की जा रही ग्रामीण बस सेवा अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह भटकती नजर आ रही है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को ब्लॉक एवं जिला मुख्यालय तक सुगम यातायात सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।
जानकारी के अनुसार इन बसों में केवल गांवों के नाम जोड़ दिए गए हैं, जबकि वास्तविकता में ये बसें दिनभर एक शहर से दूसरे शहर के बीच व्यावसायिक संचालन कर रही हैं। विशेष रूप से मथुरा–गोवर्धन–बरसाना मार्ग पर इन निजी बस संचालकों की मनमानी और दबंगई खुलेआम देखने को मिल रही है।
सूत्रों के मुताबिक इन निजी बसों का संचालन इस प्रकार किया जा रहा है कि बस स्टेशन पहुंचते ही इन्हें सबसे पहले काउंटर पर लगा दिया जाता है, जिससे उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के नियमित चालक-परिचालकों में भारी रोष व्याप्त है। निगम कर्मचारियों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर निजी बसों को प्राथमिकता दी जा रही है।
इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि एक निजी बस मालिक द्वारा बस स्टेशन परिसर में खुलेआम निगम के चालक-परिचालकों, स्टेशन इंचार्ज एवं ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है तथा धमकियां दी जाती हैं। कर्मचारियों में भय का माहौल इस कदर है कि कोई भी उसके खिलाफ खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति स्वयं को “आरएम आगरा का खास” बताते हुए कहता है कि बरसाना रोड पर चल रही बसें “आरएम आगरा की पार्टनरशिप” में संचालित हो रही हैं और उन्हें कोई नहीं रोक सकता। इस प्रकार की बयानबाजी ने परिवहन निगम कर्मचारियों में असंतोष और आक्रोश को और बढ़ा दिया है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि बरसाना मार्ग पर संचालित कुछ बसों का सीधा संबंध आगरा क्षेत्रीय प्रबंधन से बताया जा रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग उठ रही है। परिवहन निगम के कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो इसका असर निगम की व्यवस्था एवं यात्रियों की सुविधा दोनों पर पड़ेगा।
अब देखना यह होगा कि शासन एवं परिवहन विभाग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या ग्रामीण बस सेवा के नाम पर हो रही कथित अनियमितताओं एवं दबंगई पर अंकुश लग पाएगा या नहीं।
रिपोर्ट नंदकिशोर शर्मा 151170853
