फ़ास्ट न्यूज़ इंडिया यूपी कासगंज l उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में परिवहन विभाग और यातायात पुलिस इन दिनों स्थानीय जनता और पत्रकारों के निशाने पर हैं। आरोप है कि एक तरफ जहाँ आम जनता और मीडियार्मियों को नियमों का हवाला देकर परेशान किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुद ट्रैफिक इंचार्ज के सरकारी वाहनों के वैध दस्तावेज तक मौजूद नहीं हैं। इस दोहरे रवैये को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है।
नियम सिखाने वालों की खुद की गाड़ियां 'डिफॉल्टर'
भीषण गर्मी के इस दौर में यदि कोई राहगीर या पत्रकार राहत के लिए शहर के भीतर सड़क किनारे हेलमेट उतारकर दो मिनट खड़ा भी हो जाए, तो यातायात पुलिस तुरंत फोटो खींचकर भारी-भरकम चालान थमा देती है। लेकिन जब खुद नियम लागू करवाने वाले अधिकारियों के वाहनों की पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
यातायात निरीक्षक लक्ष्मण सिंह का वाहन (UP87G0055) वाहन ऐप और आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इस सरकारी गाड़ी का *फिटनेस, इंश्योरेंस (बीमा) और प्रदूषण प्रमाण पत्र * काफी समय पहले ही समाप्त हो चुका है। इतना ही नहीं, नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इस वाहन पर पीछे की नंबर प्लेट तक गायब है।
वहीं आर.टी.ओ. दफ्तर की रिकवरी गाड़ी (UP87G0069) दूसरों की गाड़ियां सीज करने वाली इस सरकारी रिकवरी गाड़ी का भी जब ऑनलाइन रिकॉर्ड चेक किया गया, तो इसका भी फिटनेस और इंश्योरेंस खत्म पाया गया।
बड़ा सवाल यह है कि जब खुद सरकारी अमले की गाड़ियाँ बिना फिटनेस और बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रही हैं, तो परिवहन विभाग किस हैसियत से आम जनता और रोडवेज बसों का चालान काट रहा है? क्या कानून की परिभाषा सरकारी और निजी वाहनों के लिए अलग-अलग है?
फिटनेस के नाम पर सिर्फ औपचारिकता? प्रेशर हॉर्न पर चुप्पी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आरटीओ कार्यालय जब स्कूल बसों, रूट बसों और अन्य व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच करता है, तो नियमों को ताक पर रख दिया जाता है। नियमों के मुताबिक प्रतिबंधित होने के बावजूद आज भी शहर में धड़ल्ले से स्कूल बसों और भारी वाहनों में प्रेशर हॉर्न बज रहे हैं। जनता का सीधा आरोप है कि आरटीओ अधिकारी वाहनों को भौतिक रूप से ठीक से चेक नहीं करते या फिर 'सुविधा शुल्क' के खेल में इन गंभीर कमियों को अनदेखा कर दिया जाता है। कासगंज बस स्टैंड के सामने शीतला पैलेस पर सुविधा शुल्क (एंट्री फीस) लेकर टैक्सी वाहन का अड्डा बना हुआ है।कासगंज नगर पालिका की पोल की लाइट सही करने वाली गाड़ी में नहीं तो आगे–पीछे नंबर प्लेट है और साथ में दोनों तरफ के दरवाजे भी नहीं है क्या इन सभी चीजों को देखकर भी अनदेखा करते हैं?
अवैध कबाड़ लोडिंग और नो-एंट्री में भारी वाहनों का आतंक
कासगंज शहर के भीतर यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। नियमों के अनुसार मालवाहक वाहनों में सामान केवल गाड़ी की बॉडी की ऊंचाई तक ही भरा जाना चाहिए। इसके उलट बस स्टैंड पेट्रोल पंप के पास स्थित कबाड़ की दुकानों पर बीच सड़क पर गाड़ियां खड़ी करके, उनकी बॉडी से 6-6 फीट ऊपर तक कबाड़ और भारी सामान ओवरलोड किया जा रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।आयकर विभाग के ठीक सामने छोटे और भारी मालवाहक वाहनों ने अवैध रूप से अपना परमानेंट अड्डा बना लिया है।
अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय नागरिकों और पत्रकारों का कहना है कि टीआई और आरटीओ की टीमें रोजाना इन रास्तों से पेट्रोलिंग (गश्त) करते हुए गुजरती हैं। इसके बावजूद इन अवैध अड्डों और ओवरलोडेड वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। आँखों के सामने चल रहे इस अवैध कारोबार को अनदेखा करना अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद उच्च अधिकारी अपनी ही गाड़ियों का चालान काटते हैं या फिर हमेशा की तरह नियम सिर्फ आम जनता को प्रताड़ित करने का जरिया बने रहेंगे। रिपोर्ट संजय सिंह 151110069


