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एक युवक को सपने में भोलेनाथ बार-बार हिमालय बुलाते हैं
  • 151168597 - RAJESH SHIVHARE 0 0
    16 May 2026 06:06 AM



एक युवक को सपने में भोलेनाथ बार-बार हिमालय बुलाते हैं

 

: दिल्ली की भीड़ और बेचैन नींद

 

अरमान शर्मा, 27 साल, दिल्ली के लक्ष्मी नगर में 1RK में रहता था। डिजिटल मार्केटिंग की जॉब, इंस्टा पर रील्स, स्विगी से खाना - एकदम मॉडर्न लड़का। भगवान में आस्था थी, पर "टाइम कहाँ है मंदिर जाने का" वाला। 

 

जनवरी 2026 से अरमान की नींद उड़ गई। रोज रात को 3:07 पर एक ही सपना आता। 

 

सपना: बर्फ से ढका हिमालय। ऊँची चोटी पर एक गुफा। गुफा के बाहर त्रिशूल गड़ा है। अंदर से डमरू की आवाज़ - डम...डम...डम। और एक आवाज़ गूँजती - "आ जा पुत्र... तेरा समय आ गया... हिमालय बुलाए..." 

 

अरमान हड़बड़ाकर उठ जाता। पसीना-पसीना। शुरुआत में लगा स्ट्रेस है। डॉक्टर को दिखाया। नींद की गोली ली। पर सपना नहीं रुका। 

 

1 महीने में 20 दिन यही सपना। अरमान की परफॉर्मेंस गिर गई। बॉस ने वार्निंग दी। गर्लफ्रेंड नेहा बोली, "तू पागल हो रहा है। थेरेपी ले।"

 

14 फरवरी, वैलेंटाइन डे। नेहा ने ब्रेकअप कर लिया। बोली, "तू हिमालय-हिमालय करता रह। मैं प्रैक्टिकल लाइफ चाहती हूँ।"

 

उस रात सपना और साफ आया। इस बार गुफा के अंदर शिवलिंग दिखा। शिवलिंग के पास गणेश जी की छोटी मूर्ति। और आवाज़ आई - "बेटे को साथ लाना... बिना प्रथम पूज्य के कैलाश अधूरा है..."

 

अरमान चीखकर उठा। 3:07 AM। उसने फोन उठाया और गूगल किया - "Shiv temple in Himalayas with Ganesha idol inside cave"। 

 

भाग 2: रुद्रनाथ की पुकार

 

गूगल ने 10 रिजल्ट दिए। पर एक फोटो पर अरमान की नजर टिक गई - **रुद्रनाथ मंदिर, उत्तराखंड**। पंच केदार में से एक। 11,800 फीट पर। गुफा मंदिर। अंदर प्राकृतिक शिवलिंग - एक चेहरे जैसा। और लोकल लोग कहते हैं गुफा में गणेश जी भी विराजते हैं। 

 

सबसे अजीब बात - मंदिर अक्टूबर से मई तक बंद रहता है। बर्फ से रास्ता बंद। सिर्फ 15 मई से 20 अक्टूबर तक खुलता है। 

 

आज तारीख थी 15 फरवरी। मंदिर बंद। रास्ते में 8 फीट बर्फ। 

 

अरमान ने पंडित जी को कॉल किया गोपेश्वर में। "पंडित जी, रुद्रनाथ जाना है अभी।"

 

पंडित जी हँसे, "बेटा, पागल है क्या? मई से पहले कोई नहीं जाता। मर जाएगा। -20 डिग्री है वहाँ।"

 

"पर मुझे सपने आ रहे हैं पंडित जी। भोलेनाथ बुला रहे हैं।"

 

फोन पर सन्नाटा। फिर पंडित जी धीरे से बोले, "बेटा, अगर भोले बुला रहे हैं तो काल भी रास्ता देगा। पर एक शर्त - अकेले मत जाना। और हाँ, गणपति बप्पा को साथ ले जाना। रुद्रनाथ में पहले गणेश जी की पूजा होती है, फिर रुद्र की। बिना विघ्नहर्ता के रुद्र दर्शन नहीं देते।"

 

अरमान ने फैसला कर लिया। 16 फरवरी को जॉब से रिजाइन किया। अकाउंट में 80 हजार थे। एक बैगपैक, गर्म कपड़े, और चांदनी चौक से 2 इंच की पीतल की गणेश मूर्ति खरीदी। 

 

माँ को फोन किया, "माँ, मैं हिमालय जा रहा हूँ।" 

माँ रोई, "बेटा, क्या हो गया तुझे?"

"पता नहीं माँ। पर जाना पड़ेगा। भोलेनाथ बुला रहे हैं।"

 

भाग 3: मौत का रास्ता, और पहला विघ्न

 

18 फरवरी। अरमान ऋषिकेश पहुँचा। वहाँ से गोपेश्वर, फिर सगर गाँव। सगर से रुद्रनाथ 20 किलोमीटर का ट्रेक। गर्मी में 2 दिन लगता है। बर्फ में? कोई नहीं जानता। 

 

सगर में कोई गाइड जाने को तैयार नहीं। सबने कहा, "भाई, आत्महत्या मत कर।" 

 

एक 60 साल का बूढ़ा गाइड मिला - भूपाल सिंह। बोला, "20 हजार लूँगा। और अगर तूफान आया तो वहीं छोड़कर आ जाऊँगा। मंजूर?"

 

अरमान ने हाँ कर दी। 

 

19 फरवरी सुबह 4 बजे ट्रेक शुरू। -15 डिग्री। 8 फीट बर्फ। हर कदम पर मौत। 

 

6 किलोमीटर बाद पहला विघ्न - **एवलांच**। दूर पहाड़ से बर्फ का सैलाब आया। भूपाल चिल्लाया, "भाग!" 

 

अरमान फिसला। बर्फ में 10 फीट नीचे दब गया। साँस बंद। अंधेरा। 

 

तभी उसे होश आया। बैग में गणेश जी की मूर्ति थी। उसने मन में बोला, "बप्पा, अभी नहीं... भोलेनाथ के पास पहुँचना है..." 

 

चमत्कार - ऊपर से बर्फ हटी। भूपाल ने उसे खींचकर निकाला। भूपाल की आँखें फटी थीं, "बेटा, तू 5 मिनट दबा था। जिंदा कैसे?" 

 

अरमान ने बैग से गणेश जी निकाले। बर्फ से सने थे, पर मुस्कुरा रहे थे। 

 

भूपाल ने माथा टेक दिया, "विघ्नहर्ता साथ है तेरे। चल, अब भोले तक पहुँचाएँगे।"

 

भाग 4: गुफा, डमरू और दूसरा विघ्न

 

3 दिन, 2 रातें। भूख, ठंड, थकान। 21 फरवरी की शाम। -22 डिग्री। 

 

सामने रुद्रनाथ। बर्फ से ढकी गुफा। त्रिशूल बिल्कुल सपने जैसा गड़ा था। पर गुफा का मुँह बंद था। 15 फीट बर्फ जमी थी। 

 

भूपाल रोया, "बेटा, माफ कर दे। बर्फ तोड़ना नामुमकिन। 3 महीने लगेंगे पिघलने में।"

 

अरमान टूट गया। इतनी दूर आकर... दरवाजे पर... 

 

वो बर्फ पर बैठ गया। गणेश जी को निकाला और रोने लगा, "बप्पा, आपने बुलाया, आपने ही रोक दिया?"

 

तभी डमरू की आवाज़। डम...डम...डम। बर्फ के अंदर से। 

 

अरमान और भूपाल चौंके। आवाज़ गुफा से आ रही थी। 

 

अरमान चिल्लाया, "भोलेनाथ! दरवाजा खोलो!" 

 

जवाब नहीं। सिर्फ डमरू। 

 

भूपाल बोला, "बेटा, कहते हैं रुद्रनाथ में भोले खुद डमरू बजाते हैं जब भक्त सच्चा हो। पर दरवाजा..."

 

अरमान को याद आया - सपने में आवाज़ आई थी "बेटे को साथ लाना"। 

 

उसने गणेश जी को बर्फ पर रखा और माथा टेका, "बप्पा, आप रास्ता बनाओ। आप विघ्नहर्ता हो।"

 

जैसे ही माथा टेका, **बर्फ में दरार**। ज़ोर की आवाज़। 15 फीट बर्फ दो हिस्सों में बंट गई। बीच में 3 फीट का रास्ता बन गया। गुफा का मुँह खुल गया। 

 

भूपाल गिरकर दंडवत हो गया, "कलयुग में चमत्कार देख लिया..."

 

भाग 5: गर्भगृह और तीसरा विघ्न - आखिरी परीक्षा

 

गुफा के अंदर घुप्प अंधेरा। टॉर्च जलाई। सामने प्राकृतिक शिवलिंग - बिल्कुल इंसान के चेहरे जैसा। "रुद्र" रूप। पास में छोटा सा पानी का कुंड। और शिवलिंग के ठीक बगल में एक छोटी सी जगह - जहाँ गणेश जी की पिंडी होनी चाहिए। पर थी नहीं। खाली। 

 

अरमान का दिल बैठ गया। सपने में यहाँ गणेश जी थे। 

 

तभी गुफा काँपी। ऊपर से बर्फ गिरने लगी। भूपाल चिल्लाया, "गुफा बैठ रही है! भाग!" 

 

ये तीसरा विघ्न था - **मौत का विघ्न**। 

 

भूपाल भाग गया। अरमान अकेला रह गया। उसने सोचा - इतनी दूर आकर मर जाऊँ? पर फिर सोचा - भोलेनाथ ने बुलाया है तो मरवाने के लिए नहीं। 

 

उसे याद आया - "बेटे को साथ लाना"। 

 

उसने बैग से अपनी गणेश मूर्ति निकाली। 2 इंच की पीतल की। वो काँपते हाथ से उसे खाली जगह पर रखा। 

 

"बप्पा, आपकी जगह है ये। आप विराजो। बिना आपके रुद्र दर्शन अधूरे हैं।"

 

जैसे ही मूर्ति रखी, चमत्कार। 

 

गुफा का काँपना बंद। 

शिवलिंग से पानी की धारा निकली और गणेश जी का अभिषेक करने लगी। 

हवा में डमरू बजा - डम-डम-डम। 

और एक आवाज़ गूँजी - "आ गया पुत्र... ले आया बेटे को... अब विघ्न कटे... वर माँग..."

 

अरमान की आँखों से आँसू बह निकले। 2 महीने का पागलपन, मौत का रास्ता, सब सार्थक। 

 

"क्या माँगू भोलेनाथ? मुझे कुछ नहीं चाहिए।"

 

"माँग पुत्र। बिना माँगे भी देता हूँ, पर माँगने पर प्रेम बढ़ता है।"

 

अरमान 1 मिनट सोचता रहा। फिर बोला, "भोलेनाथ, मेरे जैसे कितने भटके हुए हैं शहरों में। डिप्रेशन, अकेलापन, सुसाइड। उन्हें रास्ता दिखाओ। और बप्पा को हर घर में पहुँचाओ। क्योंकि जहाँ बप्पा नहीं, वहाँ विघ्न बहुत हैं।"

 

हवा में अट्टहास गूँजा। "तथास्तु। तू मेरा दूत बनेगा। जा, कलयुग में विघ्नहर्ता का नाम फैला। जिसने बेटे को मेरे पास पहुँचाया, उसके घर कभी विघ्न नहीं आएगा।"

 

भाग 6: वापसी और नया अरमान

 

जब अरमान गुफा से निकला, बर्फबारी रुक चुकी थी। मौसम साफ। भूपाल बाहर रो रहा था। उसे लगा अरमान मर गया। 

 

अरमान को देखकर वो पैरों पर गिर पड़ा, "तू आदमी नहीं देवता है..."

 

वापसी का 20 किलोमीटर 1 दिन में पूरा हुआ। जैसे रास्ता खुद बन रहा हो। 

 

1 मार्च को अरमान दिल्ली लौटा। माँ से लिपटकर रोया। 

 

नेहा को कॉल किया। सारी कहानी सुनाई। नेहा 2 दिन बाद उसके घर आई। गणेश जी को देखकर बोली, "आई एम सॉरी। मुझे लगा तू पागल है। तू तो चुना हुआ है।"

 

भाग 7: "हिमालय वाला" और विघ्नहर्ता मिशन

 

आज 14 मई 2027 है। अरमान अब "अरमान शर्मा" नहीं, "हिमालय वाला" के नाम से फेमस है। 

 

उसने जॉब छोड़ दी। ऋषिकेश में "विघ्नहर्ता सेवा ट्रस्ट" खोला है। काम क्या है? 

 

डिप्रेशन में युवाओं को फ्री में हिमालय ट्रेक कराता है। रुद्रनाथ नहीं, आसान ट्रेक। ट्रेक के पहले सबको एक छोटी गणेश मूर्ति देता है। बोलता है, "जब लगे गिर जाओगे, बप्पा को पकड़ लेना।"

**5000 घरों में गणेश जी पहुँचा चुका है**। गरीब घरों में फ्री। 

**हर अमावस्या को लाइव आता है**। अपनी कहानी सुनाता है। लास्ट में बोलता है - "भोलेनाथ सबको नहीं बुलाते। पर गणपति बप्पा हर किसी के घर आ सकते हैं। उन्हें बुला लो, भोले खुद आ जाएँगे।"

 

नेहा अब उसकी पत्नी है। दोनों मिलकर ट्रस्ट चलाते हैं। 

 

रुद्रनाथ के पंडित जी कहते हैं, "60 साल में पहली बार देखा - फरवरी में कोई आया, और जिंदा लौटा। अरमान पर रुद्र और रिद्धि-सिद्धि दोनों की कृपा है।"

 

अरमान के कमरे में 3 चीजें हमेशा रहती हैं: 

वो 2 इंच की पीतल की गणेश मूर्ति - अब काली पड़ गई है। 

रुद्रनाथ की बर्फ की एक शीशी। 

एक बोर्ड - "सपने में भोलेनाथ बुलाएँ तो डरना मत। पहले बप्पा का हाथ पकड़ना, फिर हिमालय जाना। क्योंकि कैलाश का रास्ता विघ्नहर्ता से होकर जाता है।"

 

रात को 3:07 पर अब अरमान को सपना नहीं आता। नींद आती है। गहरी। 

 

क्योंकि जिसे भोलेनाथ बुलाते हैं, और जो बेटे को साथ ले जाता है, उसके जीवन के सारे विघ्न भोले खुद हर लेते हैं। 

 

सीख: हिमालय सिर्फ पहाड़ नहीं, बुलावा है। पर उस बुलावे पर जाने से पहले घर के मंदिर में गणेश जी को मनाना जरूरी है। क्योंकि शास्त्र कहते हैं - "शिवस्य पूजनं व्यर्थं बिना विघ्नेश पूजनम्"। 

 

यानी बिना गणेश पूजा के शिव पूजा व्यर्थ है। अरमान ने ये सीखा। अब वो दुनिया को सिखा रहा है। 

 

हर-हर महादेव। गणपति बप्पा मोरया।



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