गंगा हमारी माँ हैं और माँ का संरक्षण केवल कर्तव्य नहीं, श्रद्धा का विषय है
वाराणसी । गंगा नदी की निर्भरता, अविरलता (निरंतर प्रवाह) और निर्मलता (स्वच्छता) बनाए रखने के लिए जनता से जुड़ाव (जनभागीदारी) अत्यंत आवश्यक है। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन रेखा है, जो करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करती है । नागरिकों की सक्रिय सहभागिता ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि नदी संरक्षण अब एक राष्ट्रव्यापी जनचेतना का विषय बन चुका है।
प्लास्टिक प्रदूषण गंगा की निर्मलता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है, और इससे निपटने के लिए जन-जागरूकता व व्यवहार में बदलाव बेहद आवश्यक है। गंगा तटीय क्षेत्रों में स्थानीय भागीदारी की भूमिका गंगा निर्मलीकरण अभियान की सबसे बड़ी ताकत है।
गंगाजल में जलीय जीवन की वापसी, गंगा पुनर्जीवन की दिशा में प्रगति का सकारात्मक संकेत है।जनभागीदारी से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर हम मिट्टी, जल और जनस्वास्थ्य तीनों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक के माध्यम से निगरानी और डेटा-आधारित कार्यवाही अब अधिक सटीक और प्रभावी हो पाई है। गंगा केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि आगामी पीढ़ियों के लिए हमारी सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत का संकल्प है। दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति के तत्वावधान में गंगा आरती के दौरान उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को मां गंगा की निर्मलता से जुड़ने का आग्रह करते हुए गंगा सेवक नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने जागरूक किया ।। रविन्द्र गुप्ता
