फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। प्रमोद तिवारी ने नीट-2026 परीक्षा रद्द होने के मामले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि यह केवल एक परीक्षा का पेपर लीक नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ किया गया बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि 22 से 23 लाख से अधिक छात्रों ने वर्षों की मेहनत, संघर्ष और सपनों के साथ परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक की घटना ने उन सभी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। श्री तिवारी ने कहा कि सरकार सीबीआई जांच और कार्रवाई की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ने का प्रयास कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक सरकार की नाकामी और शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद से लेकर विधानसभाओं तक कई बार पेपर लीक का मुद्दा उठाया गया, लेकिन सरकार ने कभी गंभीरता से इसे रोकने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट का पेपर लीक होना कोई संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यदि छात्र परीक्षा पास करेंगे तो वे नौकरियों के लिए पात्र बनेंगे, लेकिन सरकार के पास रोजगार नहीं है। ऐसे में युवाओं को भ्रमित करने और उनके भविष्य को अनिश्चित बनाने की कोशिश की जा रही है। तिवारी ने कहा कि सरकार यह कह रही है कि दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाएगा और सीबीआई जांच होगी, लेकिन छात्रों का जो मानसिक तनाव, समय और आर्थिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा? लाखों परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया, कोचिंग कराई और वर्षों तक मेहनत की, लेकिन एक पेपर लीक ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था लगातार अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की शिकार हो रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता खत्म होती जा रही है और युवाओं का भरोसा टूट रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, वहीं सबसे अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं। आर्थिक मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरते हुए श्री तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार में देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और आज एक डॉलर की कीमत 95 रुपये से ऊपर पहुंच चुकी है। यह देश की आर्थिक स्थिति और सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब मोदी जी विपक्ष में थे, तब रुपये की गिरावट को देश की “साख” से जोड़ते थे और तत्कालीन सरकार पर हमला बोलते थे। अब जबकि उनकी सरकार में रुपया लगातार गिर रहा है, तब देश जानना चाहता है कि क्या अब देश की “साख” नहीं गिर रही है। प्रधानमंत्री द्वारा डीजल-पेट्रोल की बचत और सोना कम खरीदने की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने कहा कि यह बयान सरकार की विफल आर्थिक नीतियों की स्वीकारोक्ति है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों से देश में भाजपा की सरकार है, फिर भी अगर देश आर्थिक संकट और महंगाई से जूझ रहा है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि फिजूलखर्ची रोकने की सलाह देने से पहले सरकार और भाजपा को खुद उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल, बिहार और असम सहित विभिन्न राज्यों के शपथ ग्रहण समारोहों में बड़े पैमाने पर नेताओं, मंत्रियों और पदाधिकारियों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन आयोजनों में सरकारी संसाधनों, हेलीकॉप्टरों और वाहनों पर भारी खर्च किया जाता है। श्री तिवारी ने कहा कि शपथ ग्रहण जैसे कार्यक्रम सादगीपूर्ण तरीके से भी हो सकते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “पर उपदेश कुशल बहुतेरे”, दूसरों को सीख देना आसान है, लेकिन पहले खुद उस पर अमल करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाए और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
