- प्रतापगढ़ में नवजात शिशु पुनर्जीवन कार्यक्रम का आयोजन
- जन्म के समय आपात स्थिति से निपटने का दिया गया प्रशिक्षण
- विशेषज्ञों ने सिखाईं नवजात शिशुओं की जीवन रक्षक तकनीकें
- डॉ. आरके पांडेय बोले— शुरुआती मिनट होते हैं सबसे महत्वपूर्ण
- एनआरपी प्रशिक्षण से बढ़ेगी नवजात शिशुओं के जीवित रहने की संभावना
- स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर जोर, नियमित प्रशिक्षण की अपील
यूपी प्रतापगढ़। नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी लाने तथा जन्म के समय उत्पन्न होने वाली आपात परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर में नवजात शिशु पुनर्जीवन कार्यक्रम (एनआरपी) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशुओं की आपातकालीन देखभाल और जीवन रक्षक तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद कई बार नवजात शिशुओं को सांस लेने में कठिनाई, ऑक्सीजन की कमी, कमजोर हृदयगति अथवा अन्य गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा तुरंत और सही तरीके से किया गया उपचार शिशु के जीवन को बचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होता है। एसएनसीयू के नोडल अधिकारी डा. आरके पांडेय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नवजात शिशु पुनर्जीवन कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि एनआरपी प्रशिक्षण के माध्यम से चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को संकटग्रस्त नवजात शिशुओं की स्थिति को पहचानने तथा तत्काल उपचार प्रदान करने की व्यावहारिक जानकारी दी जाती है। इससे नवजात शिशुओं के जीवित रहने की संभावना बढ़ती है और उनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि जन्म के शुरुआती कुछ मिनट नवजात शिशु के जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि उस समय प्रशिक्षित टीम द्वारा सही तरीके से उपचार और पुनर्जीवन प्रक्रिया अपनाई जाए तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी को इतना दक्ष बनाना है कि वह आपात स्थिति में बिना घबराए प्रभावी कदम उठा सके। इस अवसर पर डा. आरबी यादव, डा. नेहा सहित नर्सें, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी एवं अन्य चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और सुरक्षित भविष्य के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नियमित आयोजन आवश्यक है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। देखें प्रतापगढ़ से विशाल रावत की ख़ास रिपोर्ट

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