शादी का नाम सुनते ही ज़हन में सात फेरों, निकाह और जश्न की तस्वीरें उभरती हैं, लेकिन इंडोनेशिया और मलेशिया के बोर्नियो द्वीप पर बसने वाले टिडोंग समुदाय की परंपरा सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
यहाँ शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन का स्वागत फूलों की सेज से नहीं, बल्कि एक ऐसी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से होता है
जैसे ही निकाह की रस्में पूरी होती हैं, इस नवविवाहित जोड़े को एक कमरे में कैद कर दिया जाता है और शुरू होता है 72 घंटों का वह कड़ा इम्तिहान, जहाँ उन्हें शौचालय (टॉयलेट) जाने की सख्त मनाही होती है। कल्पना कीजिए—तीन दिन और तीन रातें बिना किसी राहत के! इसे दुनिया की सबसे अजीबोगरीब और कष्टदायक परंपराओं में गिना जाता है।
इस दौरान दूल्हा-दुल्हन की हालत पस्त न हो जाए और वे गलती से भी कुदरत की पुकार (Nature’s call) को न सुन लें, इसके लिए उन्हें नाममात्र का खाना और चंद घूंट पानी दिया जाता है। उनकी हर हरकत पर परिवार के बुजुर्गों की चील जैसी निगाहें टिकी होती हैं ताकि वे छिपकर भी इस नियम को न तोड़ सकें।
लेकिन आखिर इतना जुल्म क्यों? टिडोंग समाज की मान्यताएं बेहद डरावनी हैं। उनका मानना है कि यदि इस 'पवित्र' उपवास के दौरान जोड़ा टॉयलेट चला गया, तो उनकी किस्मत को ग्रहण लग जाएगा। उनकी शादी नर्क बन जाएगी, बेवफाई का साया घर में मंडराएगा और सबसे भयावह बात यह कि उनके होने वाले बच्चों की अकाल मृत्यु हो सकती है।
अपनी आने वाली नस्लों को 'शाप' से बचाने के लिए ये बेचारे नवविवाहित जोड़े तीन दिनों तक असहनीय दर्द और पेट की मरोड़ को सहते हुए बैठे रहते हैं। जब यह तीन दिनों का अग्नि-तप पूरा होता है, तब जाकर उन्हें नहाने और अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने की इजाजत मिलती है। यह रस्म साबित करती है कि प्यार पाने के लिए कभी-कभी केवल दिल ही नहीं, बल्कि शरीर को भी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।
