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सिस्टम की लापरवाही: 5 साल से खराब है मोर्चरी का फ्रीजर, सड़ रहीं लावारिस लाशें...कौन लेगा जिम्मेदारी?"
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    10 May 2026 17:10 PM



 

 बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मोर्चरी हाउस में शवों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। यहां लगा डीप फ्रीजर पिछले करीब पांच वर्षों से खराब पड़ा है, जिससे खासकर अज्ञात शवों को सुरक्षित रखने में गंभीर दिक्कतें हो रही हैं।


हालत यह है कि जर्जर भवन और खराब फ्रीजर के बीच शवों को सामान्य तापमान में रखना पड़ रहा है, जिससे वे सड़ने लगती हैं। इससे न केवल दुर्गंध फैलने का खतरा बढ़ रहा है बल्कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की शुद्धता पर भी असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।
मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में चार शवों को सुरक्षित रखने के लिए डीप फ्रीजर लगाया गया था लेकिन उसके खराब होने के बाद अब तक नया नहीं लगाया जा सका। नियमों के अनुसार, अज्ञात शवों को पहचान के लिए करीब 72 घंटे तक सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया होती है।

गर्मी के मौसम में इतनी देर तक बिना पर्याप्त शीत व्यवस्था के शव रखना बड़ी चुनौती बन जाता है। सूत्रों के मुताबिक, हर सप्ताह दो से चार अज्ञात शव मोर्चरी में लाए जाते हैं। कई बार शवों में तेजी से सड़न शुरू हो जाती है। भवन की स्थिति भी काफी खराब है। जगह-जगह सीलन और टूट-फूट है। इतना ही नहीं, कई बार चूहे और बिज्जू शवों को नुकसान पहुंचा देते हैं जिससे हालात और गंभीर हो जाते हैं।
 शव सड़ने से नहीं आएगी सही रिपोर्ट
फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. कीर्तिवर्धन के अनुसार, शवों को नियंत्रित तापमान में रखना बेहद जरूरी होता है। सामान्य तौर पर शवों को चार डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाता है ताकि शरीर में सड़न की प्रक्रिया धीमी रहे। गर्मी में तापमान बढ़ने पर शरीर तेजी से डीकंपोज होने लगता है।

इससे त्वचा, आंतरिक अंग और चोट के निशान प्रभावित हो सकते हैं। शव में सड़न बढ़ने से मौत के कारणों का सही पहचान करना कठिन हो जाता है। कई मामलों में चोट, जहर या गला दबाने जैसे अहम साक्ष्य भी प्रभावित हो सकते हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में समय और कारण का सटीक आकलन करना मुश्किल हो जाता है। डीएनए सैंपल और विसरा जांच की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
 43 हजार से अधिक विसरा हो चुके हैं खराब
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पुराने पोस्टमॉर्टम हाउस में जांच के आदेश के इंतजार में 43 हजार से अधिक विसरा सैंपल सड़ चुके हैं। इन्हें जार और झोले में रखा गया है। साल दर साल विसरा के नमूनों की संख्या बढ़ रही है मगर रूटीन में विसरा सैंपल जांच के लिए नहीं भेजे जाते। जिस केस में कोर्ट का ऑर्डर होता है, उन्हीं में सैंपल जांच के लिए लैब भेजे जाते हैं।

डीप फ्रीजर खराब होने का मामला संज्ञान में आया है। इसे जल्द ठीक करा लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बदल दिया जाएगा: डॉ. राजेश कुमार झा, सीएमओ रिपोर्टर फूलमती मौर्य 151188511



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