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गुजरात स्थापना दिवस पर डांडिया–गरबा की रंगारंग प्रस्तुति, गरिमामय उपस्थिति में कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न
  • 151009219 - RAVINDRA GUPTA 0 0
    04 May 2026 19:59 PM



 भारतीय संस्कृति की विविधता हमारी शक्ति :- कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा

 गरबा और डांडिया भारतीय लोकजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति”:- प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा

वाराणसी । सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के मुख्य भवन में आज अपराह्न 1:00 बजे कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में गुजरात स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित डांडिया एवं गरबा नृत्य कार्यक्रम हर्षोल्लास, सांस्कृतिक गरिमा एवं व्यापक जन-उपस्थिति के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यहां आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय हो उठा।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता हमारी सबसे बड़ी धरोहर है। उन्होंने कहा कि डांडिया और गरबा जैसे लोकनृत्य केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना और परंपराओं के जीवंत प्रतीक हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक जागरूकता की भावना सुदृढ़ होती है।

कार्यक्रम की समन्वयक प्रोफेसर विद्या कुमारी चंद्रा ने अपने वक्तव्य में डांडिया एवं गरबा की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह नृत्य परंपराएँ भक्ति, ऊर्जा और सामूहिकता का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें और इस प्रकार के आयोजनों में सक्रिय सहभागिता करें।

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक गुजराती वेशभूषा में मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनकी लय, ताल और समन्वय ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किया गया।

अंत में, कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों, प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आयोजकों ने कहा कि सभी की सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग से ही यह सांस्कृतिक आयोजन भव्यता एवं सफलता के शिखर तक पहुँचा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लेते हुए भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पुनः व्यक्त की।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रो विधु द्विवेदी, डॉ विशाखा शुक्ला, डॉ विजय कुमार शर्मा, डॉ. रानी द्विवेदी सहित अन्य अध्यापक एवं विद्यार्थियों ने सहभाग किया ।। रविन्द्र गुप्ता 



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