एम्स में इलाज के लिए दूर-दराज के जिलों से रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों के लिए अस्पताल परिसर में बने रैन बसेरों में कमरे नहीं मिल रहे हैं और न ही परिसर में जगह मिल पा रही है। रैन बसेरे में जगह नहीं मिलने पर कई तीमारदारों को पेड़ों के नीचे, खुले आसमान के नीचे या अस्पताल परिसर के किनारे रात गुजारनी पड़ रही है।
एम्स परिसर में वर्तमान समय में तीमारदारों के लिए कुल 145 बेड की व्यवस्था है। सामान्य दिनों में यहां रोजाना 100 से अधिक तीमारदार ठहरते हैं, लेकिन इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण तीमारदारों की संख्या भी काफी बढ़ गई है। ऐसे में रैन बसेरे के सभी बेड जल्दी भर जा रहे हैं और देर रात पहुंचने वालों को जगह नहीं मिल पा रही है।
अस्पताल में इलाज कराने के लिए बिहार, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती और सिद्धार्थनगर जैसे जिलों से मरीज आते हैं। इलाज लंबा चलने या भर्ती होने की स्थिति में उन्हें कई दिन रुकना पड़ता है। रैन बसेरे में जगह न मिलने से उन्हें पेड़ों के नीचे चादर बिछाकर दिन-रात बितानी पड़ती है।
दिन में तेज धूप और रात में मच्छरों व उमस से उन्हें काफी परेशानी होती है। सोमवार को दोपहर एक बजे देवरिया से आए आशीष पांडेय ने बताया कि अस्पताल प्रशासन को बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त बेड और अस्थायी रैन बसेरे की व्यवस्था करनी चाहिए।
खासकर गर्मी के मौसम में खुले में रहने में काफी मुश्किल हो रही है। वहीं झंगहा क्षेत्र के रितेश की बेटी भर्ती हैं। बेटी की मां ने बताया कि रैन बसेरा में रहने के लिए गए थे। सामान ज्यादा होने के कारण बसेरा वालों ने वहां रखने से इन्कार कर दिया। ऐसे में लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बेटी भर्ती हैं तो यहां तीन-चार लोगों की जरूरत पड़ रही है
रिपोर्टर फूलमती मौर्य 151188511
