गोरखपुर। डॉ. भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के शिक्षा शास्त्र विभाग के अधिष्ठाता प्रो. राज शरण शाही ने कहा कि शिक्षा की जड़ें राष्ट्र की संस्कृति से जुड़ी होनी चाहिए। भारतीय संस्कृति के केंद्र में मनुष्यता है ना कि भौतिकता। विकसित भारत का लक्ष्य विश्व मानवता की सुरक्षा का उद्घोष है।
वह शनिवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी व पुरातन छात्र सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। प्रो. राजशरण ने कहा कि भारतीय शिक्षा को सूचना का नहीं बल्कि ज्ञान का केंद्र बनाने की आवश्यकता है। वर्तमान भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत है ताकि सामयिक परिवर्तन से कुशल शिक्षकों का निर्माण कर विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है
अध्यक्षता शिक्षा संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुनीता दुबे ने की। संगोष्ठी की प्रस्तावना प्रो. सुषमा पांडेय ने रखी। संचालन डॉ. राजेश कुमार सिंह व आभार ज्ञापन प्रो. उदय सिंंह ने किया।
शैक्षिक उन्नयन के लिए पुरातन छात्रों की भूमिका सराहनीय : कुलपति
विभाग के पुरातन छात्र सम्मेलन की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की। उन्होंने कहा कि शैक्षिक उन्नयन एवं सामाजिक परिवर्तन के लिए पुरातन छात्रों की भूमिका सराहनीय है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्वांचल विकास बोर्ड के सांख्यिकी अधिकारी प्रशांत मिश्र, सीतापुर के जिला खाड़सारी अधिकारी राजेश उपाध्याय समेत कई पुरातन छात्रों ने विभाग के विकास में योगदान के लिए प्रतिबद्धता जताई। इस अवसर पर डॉ. विभ्राट चंद्र कौशिक, प्रो. बृजेश पांडेय, प्रो. कुमुद त्रिपाठी, प्रो. विजय राय, प्रो. मैथिली रमण सिंह, प्रो. अर्चना पांडेय, डॉ. धर्मव्रत तिवारी, डॉ. चमन राय, डॉ. सुमन पांडेय, डॉ. ममता चौधरी, डॉ. मीतू सिंह, डॉ. दुर्गेश पाल, डॉ. अनुपम सिंह आदि मौजूद रहे।
रिपोर्टर फूलमती मौर्य 151188511
