- कागजों में बनी गौशाला, सड़कों पर घूम रहे आवारा पशु
मुरैना से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद आवारा पशुओं की समस्या जस की तस बनी हुई है।
मुरैना के पवाया रोड पर दो बीघा शासकीय जमीन पर बनी गौशाला अब सिर्फ कागजों में ही सीमित नजर आ रही है। नगर परिषद द्वारा गौशाला के नाम पर 50 लाख रुपये से अधिक खर्च किए जाने का दावा किया गया, लेकिन जमीन पर हालात बदतर हैं।
जानकारी के अनुसार, कई वर्षों से नगर परिषद कर्मचारियों द्वारा आवारा पशुओं की धर-पकड़ नहीं की गई है। इसका नतीजा यह है कि सड़कों और बाजारों में पशुओं का आतंक बढ़ता जा रहा है।
अब तक एक दर्जन से अधिक लोग—महिलाएं और पुरुष—इन आवारा पशुओं के हमलों में घायल होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। खासकर सब्जी मंडी का हाल बेहद खराब है, जहां लोग जाने से भी डरने लगे हैं।
स्थानीय
“कभी भी ये पशु हमला कर देते हैं, बाजार आना खतरे से खाली नहीं है…”
वहीं, गौशाला की देखभाल गौ-रक्षक अपने निजी खर्च से कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें शासन की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल रही।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं, तो आखिर जिम्मेदार कौन है? और कब तक जनता इस समस्या से जूझती रहेगी? देखे राम लखन की रिपोट
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