उत्तराखंड, काशीपुर: स्टोन क्रेशर की आड़ में करोड़ों का ‘खेला’, मास्टरमाइंड अनूप अग्रवाल पर मुकदमा दर्ज
3.5 करोड़ की जमीन और 5.25 करोड़ का लोन हड़पने का आरोप; पिस्टल दिखाकर दी जान से मारने की धमकी
काशीपुर तीर्थनगरी और आसपास के क्षेत्रों में भू-माफियाओं और जालसाजों के हौसले बुलंद हैं। काशीपुर में एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है जहाँ स्टोन क्रेशर में साझेदारी का झांसा देकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी अनूप अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
मुख्य बिंदु: धोखाधड़ी की पूरी इनसाइड स्टोरी
जमीन हड़पने का मास्टरप्लान: पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें 36% हिस्सेदारी का लालच दिया गया। इस झांसे में लेकर करीब 6 एकड़ जमीन (बाजार मूल्य 3.5 करोड़ रुपये) अनूप अग्रवाल ने अपनी पत्नी के नाम बैनामा करा ली, लेकिन उसका भुगतान कभी नहीं किया।
बैंक लोन का गबन: “मुरलीवाला स्टोन इंडस्ट्रीज” के नाम पर करीब 5.25 करोड़ रुपये का बैंक लोन स्वीकृत कराया गया। आरोप है कि यह भारी-भरकम राशि व्यापार में लगाने के बजाय निजी खातों में ट्रांसफर कर खुर्द-बुर्द कर दी गई।
धमकी और दहशत: जब पीड़ितों ने अपना हिसाब और हक मांगा, तो उन्हें कथित तौर पर पिस्टल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई। आरोपी की दबंगई के कारण पीड़ित परिवार इस समय गहरे खौफ में है।
कानूनी कार्रवाई और धाराएं
पीड़ितों की तहरीर के आधार पर, काशीपुर कोतवाली में 20 अप्रैल 2026 को मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं में शिकंजा कसा है:
धारा 420: धोखाधड़ी और बेईमानी।
धारा 504: शांति भंग करने के इरादे से अपमान।
धारा 506: आपराधिक धमकी (जान से मारने की धमकी)।
”मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड और बैनामे से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
— स्थानीय पुलिस प्रशासन
पुराना रिकॉर्ड और कार्यशैली पर सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि अनूप अग्रवाल का विवादों से पुराना नाता रहा है और उसके खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हैं। बार-बार इस तरह की घटनाओं को अंजाम देना क्षेत्र की कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
बड़ा सवाल: क्या मिलेगा न्याय?
यह मामला सिर्फ एक व्यापारिक धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि एक परिवार के विश्वास और उनकी जमा-पूंजी को सोची-समझी साजिश के तहत हड़पने का है। अब क्षेत्र की जनता की नजरें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस ‘सफेदपोश’ जालसाज पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर दबंगई एक बार फिर न्याय पर भारी पड़ेगी?
