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मंत्री की चिट्ठी भी रही बेअसर, बेटे के इलाज के लिए मां ने बेची पायल; वायरल हुआ दर्द तो डीएम ने थामी बांह
  • 151173981 - JIYAUL HAQ KHAN 65 76
    21 Apr 2026 19:57 PM




पीलीभीत में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुली: मजबूरी में जेवर बेचने को तैयार हुई मां, अब प्रशासन ने दी 50 हजार की मदद

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक मां को अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए अपनी पायल तक बेचनी पड़ गई। यह घटना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि इस मामले में खुद राज्यमंत्री की सिफारिशी चिट्ठी भी बेअसर साबित हुई।
शहर के बल्लभ नगर की रहने वाली रामकली का बेटा श्यामसुंदर किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। बेटे की जान बचाने के लिए बेबस मां ने गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार से गुहार लगाई थी। मंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए लखनऊ के केजीएमयू निदेशक के नाम पत्र भी लिखा, लेकिन अस्पताल में न तो मरीज को भर्ती किया गया और न ही किसी ने फोन उठाया।
इलाज न मिलने और आर्थिक तंगी के कारण हारकर मां को अपनी पायल बेचनी पड़ी और वह भारी मन से बेटे के साथ वापस घर लौट आई।
जब यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और प्रशासन की अनदेखी की तस्वीरें सामने आईं, तो जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया। सोमवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित 'जनता दरबार' में रामकली ने अपनी आपबीती सुनाई।
डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत रेड क्रॉस सोसाइटी की ओर से पीड़ित परिवार को तत्काल 50 हजार की आर्थिक मदद प्रदान की गई। जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर श्रद्धा सिंह के माध्यम से नई पायलें भी भेंट करवाईं! और भविष्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महिला का नया राशन कार्ड बनवाया गया।
डीएम के निर्देश के कुछ ही मिनटों के भीतर स्वास्थ्य विभाग की टीम पीड़ित के घर पहुंची।
देर शाम जिलाधिकारी स्वयं पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और श्यामसुंदर को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि, प्रशासन हर गरीब और लाचार व्यक्ति के साथ खड़ा है। पीड़ित परिवार को हर संभव सरकारी मदद मुहैया कराई जाएगी और इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह मामला एक तरफ प्रशासनिक तत्परता की मिसाल पेश करता है, तो दूसरी तरफ बड़े अस्पतालों की उस कार्यशैली को भी उजागर करता है जहाँ मंत्री की चिट्ठी के बावजूद एक गरीब को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। रिपोर्ट जियाउल हक़ खान पीलीभीत -151173981



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