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भारत-नेपाल ने मिलाए हाथ: पीलीभीत टाइगर रिजर्व में गूंजा वन्यजीव संरक्षण का साझा संकल्प
  • 151173981 - JIYAUL HAQ KHAN 54 65
    20 Apr 2026 19:50 PM




नेपाली दल ने सीखा पीलीभीत का 'बाघ मित्र' मॉडल; सीमा पार वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा पर बनी सहमति

पीलीभीत। भारत और नेपाल के बीच वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को लेकर रिश्तों की एक नई इबारत लिखी गई है। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) के प्रसिद्ध 'चूका ईको-टूरिज्म पॉइंट' पर एक उच्च स्तरीय महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय बैठक का मुख्य केंद्र दोनों देशों के बीच साझा वन्यजीव सीमाओं और उनके संरक्षण की चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना था।
नेपाल के बर्दिया नेशनल पार्क से 19 सदस्यीय एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस गोष्ठी में शामिल होने पीलीभीत पहुँचा। हेमंत आचार्य के नेतृत्व में आए इस दल में बफर ज़ोन मैनेजमेंट काउंसिल के चेयरमैन, विभिन्न उपभोक्ता समितियों के अध्यक्ष, पार्क रेंजर और लेखाधिकारी शामिल थे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पीलीभीत टाइगर रिजर्व के सफल संरक्षण कार्यों और यहाँ की बेहतरीन प्रबंधन प्रणाली का गहराई से अध्ययन करना था।
गोष्ठी के दौरान भारतीय विशेषज्ञों ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रबंधन की बारीकियों को साझा किया। नेपाली प्रतिनिधियों ने यहाँ के 'ईको-टूरिज्म मॉडल' और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी की जमकर प्रशंसा की। विशेष रूप से भारत के 'बाघ मित्र' कार्यक्रम और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में दी जाने वाली त्वरित मुआवजा प्रक्रिया ने नेपाली दल को बेहद प्रभावित किया।
जवाब में, नेपाली दल ने भी अपने यहाँ चल रहे सफल 'हाथी मित्र कार्यक्रम' और 'सामुदायिक वन प्रबंधन योजना' के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने वन्यजीवों के संरक्षण में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। इस गोष्ठी का कुशल संचालन पीलीभीत टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्राधिकारी अरुण मोहन श्रीवास्तव और WWF इंडिया के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार लोधी ने किया। बाघ मित्र समिति के अध्यक्ष अतुल सिंह ने 'बाघ मित्र' की भूमिका को स्पष्ट किया, जबकि ईको विकास समिति के अध्यक्ष देवव्रत सिकदर और अजमत खान ने स्थानीय समुदायों को संरक्षण से जोड़ने के अपने जमीनी अनुभवों को साझा किया।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के साझा अनुभवों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भविष्य में दोनों देशों के बीच वन्यजीवों का आवागमन सुरक्षित होगा और भारत-नेपाल सीमा पर जैव विविधता के संरक्षण को एक नई मजबूती मिलेगी। रिपोर्ट जियाउल हक़ खान पीलीभीत -151173981



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