फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। सृजना साहित्यिक संस्था उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में न्यू एंजिल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल के ऑडिटोरियम में अंतर्राष्ट्रीय अवधी भाषा साहित्यिक संगोष्ठी एवं भव्य लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अवधी भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को नए आयाम देते हुए कई महत्वपूर्ण काव्य संग्रहों का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर डॉ. दयाराम मौर्य ‘रत्न’ द्वारा रचित “आखर आखर सबद”, वरिष्ठ कवि कुंजबिहारी काकाश्री की कृति “असल बाप तो हमही अही” तथा श्रीनाथ सरस की पुस्तक “शशि की कान्ति” का विधिवत विमोचन हुआ। समारोह में देश-विदेश से जुड़े साहित्यकारों की उपस्थिति ने इसे अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. एम. गोविन्द राजन ने कहा कि अवधी भाषा आज वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रही है। मुख्य अतिथि डॉ. राम बहादुर मिश्र ने अवधी को जन-जन की भाषा बताते हुए कहा कि इसका साहित्य सरल, सरस और सर्वग्राह्य है। संपादक एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दयाराम मौर्य ‘रत्न’ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अवधी लोकमानस और लोकचेतना की सशक्त अभिव्यक्ति है। वहीं अति विशिष्ट अतिथि प्रदीप सारंग ने अवधी में अधिकाधिक लेखन को समय की आवश्यकता बताया। डॉ. नीरज शुक्ल ने कहा कि वर्तमान समय में अवधी साहित्य की पहुंच विश्व स्तर तक हो चुकी है। संगोष्ठी के दौरान आचार्य अनीस देहाती, बेचन लाल विनोदी, लखन प्रतापगढ़ी, सुप्रिया पांडेय, राधेश्याम दीवाना, प्रेमकुमार त्रिपाठी ‘प्रेम’, कुंजबिहारी काकाश्री, श्रीनाथ सरस, अमरनाथ बेजोड़, यदुवंशी रसिकाचार्य सहित अनेक कवियों ने अवधी में काव्यपाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन अनिल कुमार निलय ने किया। इस अवसर पर रोशन लाल ऊमरवैश्य, राजेश हर्षपुरी, राकेश कनौजिया, सुनील कुमार, विवेक कुमार सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल अवधी भाषा के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, बल्कि स्थानीय से वैश्विक स्तर तक इसकी बढ़ती लोकप्रियता का भी सशक्त प्रमाण बना। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
