हण्डौर में चैबीसवें राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में बही साहित्य की रसधार
फोटो- काव्यपाठ करते साहित्यकार
फोटो-गीत सुनाती कवियत्री
फास्ट न्यूज इंडिया यूपी लालगंज, प्रतापगढ़। सगरासुन्दरपुर के समीप हण्डौर में शनिवार की रात सावित्री शैक्षणिक एवं समाज कल्याण समिति के द्वारा 24वा राष्ट्रीय कविसम्मेलन एवं मुशायरे में नामचीन कवियों ने राष्ट्रीय एवं सामाजिक विसंगतियों पर जमकर प्रहार किया। साहित्यिक आयोजन की शुरुआत शासकीय अधिवक्ता आलोक त्रिपाठी व डॉ शक्ति कुमार पांडेय के द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के द्वारा हुआ। कवि सम्मेलन का आगाज सुरेश नवीन की वाणी वंदना से हुयी। सुल्तानपुर की सपना मिश्रा ने- बांधूंगी नहीं आज तुमको प्रिया, वन को जाओ छोड़ महल अपनी प्रिया से लोगों को आध्यात्म से जोड़ा। हास्य कवि निर्झर प्रतापगढ़ी ने अपनी रचना- जय गुंडा काका, तोहरे भय से कांपे गांव गली नाका... से वर्तमान परिस्थितियों पर करारा व्यंग्य किया। शायर कृष्ण कांत कामिल ने- रंज सहते रहे मुस्कुराते रहे, साथ हम जिंदगी का निभाते रहे साथ मंच को ऊंचाई दी। सीतापुर के रोहित विश्वकर्मा ने अपनी रचना- कहीं गुस्सा आई लव यू उनसे बोलने वाले, वही लड़की भी उनकी बाद में चप्पल भी खाते हैं सुनाकर लोगों को गुदगुदाया। लखीमपुर खीरी रंजना सिंह हया ने- इक नजर तुझको देखने आई हूं मैं, देख लूं इक नजर फिर चली जाऊंगी से युवाओं को झकझोरा। मुख्य अतिथि भाजपा नेता एवं ब्लॉक प्रमुख पति डॉ राकेश सिंह ने कहा कि साहित्यकार समाज का दर्पण होता है। उन्होंने कहा कि रचनाकार देश और समाज को नई दिशा देने का कार्य करता है। कवि सम्मेलन में गड़बड़ सुल्तानपुरी, हुमा अक्सीर,डॉ अंजनी अमोघ, फैयाज परवाना, विशाल श्रीवास्तव, सुरेश नवीन, बिहारी लाल अम्बर, चंद्र शेखर विकास, आशुतोष दीपक की भी रचनाएं श्रोताओं को भायी। अध्यक्षता हरिवंश शुक्ल शौर्य, संचालन हास्य कवि बिहारी लाल अम्बर ने किया। स्वागत अविनाश पाण्डेय संजय शुक्ल तथा आभार संयोजक आयोजक कवि अनूप त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर कृष्ण प्रताप सिंह मथुरा प्रसाद यादव, श्याम जी जायसवाल, अभय प्रताप सिंह मुन्ना, मनोज सिंह, आलोक कुशवाहा राजेश मिश्र, अरविंद पाण्डेय, ज्ञान प्रकाश शुक्ल, अनिल तिवारी महेश, विकास मिश्र, श्याम शंकर पांडे, आमोद तिवारी, बच्चू दुबे, विदेहानंद जी महाराज रहे। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049

