गोला थाना क्षेत्र के रामनगर में सड़क हादसे में घायल राकेश चौहान (25) की बृहस्पतिवार शाम मौत हो गई। शुक्रवार को आक्रोशित परिजन और ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और मार्ग जाम कर दिया। सूचना पर मौके पर पहुंचे जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद करीब एक घंटे बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में देर शाम शव काे परिजन गोला सरयू तट ले गए, जहां उसका अंतिम संस्कार किया गया। गोला थाना क्षेत्र के पुरसादेउर निवासी राकेश चौहान बंगलूरू में रहकर पेंटिंग पॉलिश का काम करते थे। बीते बुधवार शाम करीब सात बजे वह घर लौट रहे थे।
जैसे ही वह बांसगांव थाना क्षेत्र के धस्की के पास पहुंचे विपरीत दिशा से आ रहे वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान बृहस्पतिवार देर शाम उसकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। बृहस्पतिवार देर शाम पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचा।
गोला-कौड़ीराम मार्ग पर शव रखकर जताई नाराजगी, प्राथमिकी दर्ज
शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे परिजन और ग्रामीण शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहे थे। इसी दौरान रामनगर स्थित गोला-कौड़ीराम मार्ग पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने मृतक के परिवार के लिए नौकरी, 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।
इधर, प्रदर्शन की सूचना मिलते ही गोला पुलिस, एसडीएम बांसगांव, सीओ बांसगांव और सीओ गोला मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों के आश्वासन के बाद परिजन और ग्रामीण शांत हो गए और शव को सड़क से हटा लिया। इस दौरान कुछ समय के लिए आवागमन बाधित रहा।
पुलिस ने मामले में मृतका की पत्नी की तहरीर पर बाइक चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाकर लोगों के जीवन को खतरे में डालने समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। सीओ गोला दरवेश कुमार ने बताया कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
एक साल में ही उजड़ गया सुहाग, नहीं थी कोई संतान
सड़क हादसे में जान गंवाने वाले राकेश चौहान की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। महज एक साल पहले ही उनकी शादी उबढ़या बुजुर्ग उरुवा निवासी वंदना से हुई थी। अभी उनके जीवन की शुरुआत ही हुई थी कि हादसे ने सब कुछ छीन लिया। दोनों की कोई संतान भी नहीं थी, जिससे परिवार का दुख और गहरा हो गया है।
राकेश अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा था। इसके बाद आशीष, अरुण और आदित्य हैं। पिता ओमप्रकाश मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता विमला देवी गृहिणी हैं। ऐसे में राकेश परिवार का सहारा था और रोजगार के लिए बंगलूरू में रहकर काम करता था।
पति की मौत की खबर सुनते ही वंदना बेसुध हो गईं। उनकी आंखों के सामने अभी भी शादी के वे पल ताजा हैं, जब उन्होंने नए जीवन के सपने संजोए थे। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि राकेश मेहनती और जिम्मेदार युवक था, जो अपने परिवार को बेहतर जीवन देना चाहता था। एक पल में हुए इस हादसे ने न केवल एक जिंदगी छीन ली, बल्कि कई सपनों को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
रिपोर्टर फूलमती मौर्य 151188511
