भगवान परशुराम और भगवान राम में भेद करने वालो को एक छोटा सा post समर्पित। कुछ रामायण के संदर्भ।
(मन्दोदरी रावण से)
अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत (परशुराम) संघारे।।
जेहिं बलि बाँधि सहसभुज मारा। सोई अवतरेउ हरन महि भारा।।
रामचरितमानस- बालकाण्ड-५/४
देवता श्रीरघुवीर से
मीन कमठ सूकर नरहरी। बामन परसुरामबपु धरी।
जब जब नाथ सुरन्ह दुखु पायो। नाना तनु धरि तुम्हईं नसायो।
रामचरितमानस- बालकाण्ड- १०९/४
....क्षत्रियाधीश करिनिकर नव केसरी, परशुधर विप्र सस जलदरूपं। विनयपत्रिका-५२/६
हे कोसलपति..... आपने सहस्त्रबाहु आदि अभिमानी क्षत्रिय राजा रूपी हाथियों के समूह को विदीर्ण करने के लिए सिंह रूप और ब्राह्मण रूपी धान्य को हरा-भरा करने के लिए मेघरूप, ऐसा परशुराम अवतार धारण किया।
(मन्दोदरी रावण से) जिस समय राक्षसगण क्षत्रियरूप से उत्पन्न होकर पृथ्वी का भार हुए तब इन्होंने(रामचन्द्र) परशुरामस्वरूप से उन्हें कई बार संग्राम में मारा और पृथ्वी को जीतकर उसे कश्यप मुनि को दे दिया
अध्यात्म रामायण- युद्ध काण्ड- सर्ग १०- श्लोक५१✅
रघुवंशी राम उवाच-
मैंने ब्राह्मण परशुराम अवतार लिया .., सहस्त्रार्जुन.. वध,क्षत्रिय विनाश..👇👇
आनन्दरामायण- राज्यकाण्ड(उत्तरार्द्ध)- सर्ग २०/ श्लोक ३८-४१✅
देवी उवाच 👉श्री रामचन्द्र ही परशुराम हुए थे
श्रीमद्देवीभागवत पुराण - तृतीय स्कन्ध- अ०३० - श्लोक- ५३
महादेव द्वारा कहे गए राम सहस्त्रनाम में
आनन्दरामायण- राज्यकाण्ड(पूर्वार्द्ध)- सर्ग १/ श्लोक१६०
इन सभी अवतारों में बल की दृष्टि से, रूप की दृष्टि से और गुण की दृष्टि से किसी भी प्रकार का भेद नहीं किया जा सकता। गरुडपुराण - ३/१५/२८
इसलिए वह महामूर्ख हैं जो जय श्रीराम और जय श्री परशुराम में अंतर कहते हैं पर परशुराम भगवान को कमतर आंकने का महापाप करते हैं। वह महामूर्ख हैं जो सृष्ट्रीकर्ता श्रीहरि के रूपों के भेद नहीं समझ पाते और उसमें भेद करते हैं। वह महापापी हैं जो सहस्त्रबाहु जैसे पापी को नमस्कार करतें हैं। जब वह ऐसा करते हैं तो श्री हरी और उनके अवतार श्रीराम के साथ भी द्रोह करते हैं क्योंकि श्रीराम ने श्री परशुराम को पूजनीय कहा है। श्री परशुराम ने क्षत्रियों का नहीं बल्कि अत्याचारी, अहंकारी सामंतो का नाश किया था। उनकी शत्रुता किसी कुल से नहीं थी। भगवान श्रीराम को लंकेश और उनके कुल का वध करने के लिए ब्राह्मण विरोधी नहीं कहते बल्कि उनके सद्गुणों और आदर्शों की पूजा की जाती है।
ऐसा करने वाले अधिकतर महामूर्ख महापापी वह ही मिलेंगे जिन्होंने कभी श्री रामायण को पढ़ा नहीं। अपने ग्रंथो से दूर रहकर सोशल मीडिया पर भ्रांति फैलाने वाले इन लोगों को भगवान श्रीराम भी क्षमा नहीं करेंगे। श्री हरि के 10 के 10 अवतार श्रेष्ठ हैं और उनमें भेद करने वाला श्री हरि का द्रोही है।
